गोंडा। भिखारीपुर-सकरौर बांध के मरम्मत कार्य के लिए इस साल 12 करोड़ की परियोजना स्वीकृति हुई। बीते जनवरी में ही बजट का आवंटन भी कर दिया गया, लेकिन इंजीनियरों की लापरवाही से बजट मिलने के पांच माह बाद भी बांध मरम्मत का कार्य बीच में ही अटका है।
बाढ़ खंड के इंजीनियरों ने जलशक्ति मंत्री की फटकार के बाद भी मरम्मत कार्य में कोई तेजी नहीं दिखाई। लगातार बारिश के बाद उफान मार रही घाघरा ने बांध मरम्मत कार्य की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है। स्थिति यह है कि शुक्रवार को घाघरा खतरे के निशान 106.07 पर पहुंच गई। नेपाल से लगातार बढ़ रहे पानी के डिस्चार्ज से बाढ़ का प्रकोप कभी भी शिकंजा कस सकता है।
तहसील तरबगंज व करनैलगंज के दर्जनों गांवों को बाढ़ की तबाही से बचाने के लिए वर्ष 2006-07 में सात करोड़ की लागत से सकरौर गांव से भिखारीपुर गांव तक 22.600 किमी लंबा भिखारीपुर सकरौर रिंगबांध का निर्माण कराया गया था जो सात अगस्त 2007 को परसपुर के चंदापुर किटौली गांव के पास टूट गया। बांध की मरम्मत शुरू हुई।
इसी बीच नदी का जलस्तर बढ़ गया और नदी के पानी के दबाव में बांध अगस्त 2008 में परसपुर के पसका के इकनिया मांझा गांव के पास फिर सितंबर 2010 में बच्ची मांझा गांव के पास, 2018 में सोनौली मोहम्मद गांव के सामने और 2020 में बांध ऐलीपरसौली के विशुन पुरवा गांव के पास टूट गया।
भिखारीपुर सकरौर बांध 14 वर्ष के भीतर पांच बार टूट चुका हैं। इस वर्ष सरकार ने ऐली परसौली में बने भिखारीपुर सकरौर बांध के मरम्मत व सुदृढ़ीकरण के लिए 12 करोड़ की परियोजना स्वीकृति की थी। इसके तहत बांध के 17.590 किमी पर स्थित स्टड के नोज की पुनर्स्थापना, किमी 17.170 से 17.150 के बीच रिवेटमेंट का निर्माण परक्यूपाइन लगाने व तटबंध के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाना था।
बीते दिनों जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने निरीक्षण के दौरान जनवरी में ही बजट मिलने की बात कहते हुए मरम्मत कार्य में देरी होने पर अधिशाषी अभियंता बीएन शुक्ला को फटकार भी लगाई थी। निर्देश दिया कि अतिरिक्त मजदूरों को लगाकर कार्य को बरसात पूरा कराया जाए।
इसके बावजूद मरम्मत कार्य के लिए मजदूरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। तहसील प्रशासन की रिपोर्ट पर बीते 14 जून को डीएम मार्कंडेय शाही के औचक निरीक्षण में तटबंध मरम्मत में मजदूरों की संख्या काफी कम होने की पुष्टि भी की गयी। डीएम को तटबंध की मरम्मत में प्रयोग की जा रही सामग्री भी अधोमानक मिली थी। जिस पर संबंधित ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करने व इंजीनियरों के खिलाफ कार्यवाई को कहा गया था।
10 दिन में कार्य पूरा कराने किया वादा, आज भी अधूरा
बीते दिनों जब जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने तटबंध के कार्य का निरीक्षण किया था तो अधिशासी अभियंता बीएन शुक्ल ने 10 दिन में अधूरा कार्य पूरा कराने का भरोसा दिलाया था। शुक्रवार को जब कमिश्नर एसवीएस रंगाराव ने मरम्मत कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताई तो एक बार फिर अधिशाषी अभियंता बीएन शुक्ल ने काम पूरा करने के लिए 10 दिन का समय मांग लिया।