गोंडा। पंचायत चुनाव में प्रधान पदों पर महिलाओं के लिए बड़ा अवसर मिलेगा। आरक्षण की कवायद भले ही हो रही है, लेकिन महिलाओं के अवसर का दायरा बढ़ने से लोग अपनी पत्नी व बहू को चुनाव लड़ने के लिए राजी करने में जुटे हैं।
आरक्षण से ही 409 सीटों पर तो सिर्फ महिलाएं ही लड़ सकेंगी। इसके लिए अन्य सीटों पर भी महिलाएं दावा कर सकती है। जबकि पुरुषों के सामने अवसर सीमित है।
महिलाओं के लिए बड़े स्तर पर अवसर मिलने से पंचायत के नेता परिवार की महिलाओं को प्रधान बनाने की तैयारी करने में जुटे हैं। कई सरकारी कर्मचारी भी अपने घरों की महिलाओं को प्रधान बनाने को आतुर दिख रहे हैं। फिलहाल आरक्षण के बाद इन तैयारियों में तेजी आएगी।
शनिवार से पंचायतों के आरक्षण की कवायद तेज हो गई है। पूरी तैयारी कर ली गई है बताया जा रहा है कि इस बार महिलाओं को बड़ा अवसर मिल रहा है। उनके लिए हर वर्ग में एक तिहाई सीटें तो तय ही कर दी गईं हैं इसके अलावा वह किसी भी वर्ग के लिए तय सीट पर उसी वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ सकेंगी।
साथ ही अनारक्षित सीटों पर किसी भी वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ सकेंगी। इस स्थिति पर लोग अपने घरों की महिलाओं को चुनाव के लिए तैयार कर रहे हैं, जिससे आरक्षण होने के बाद भी वह महिलाओं को मैदान में उतार सकें।
जिले की 1214 पंचायतों में 519 को आरक्षित होंगी। जिसमें सामान्य महिलाओं के लिए 226 सीटें तय की जा रही हैं। इन सीटों पर किसी भी वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ सकेंगी। इसके साथ ही 71 पंचायतों को अनूसूचित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किया जा रहा है।
जहां सिर्फ इसी वर्ग की महिलाएं मैदान में उतर सकती हैं, इसके साथ ही 127 पंचायतें अनूसूचित वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। इन सीटों पर सिर्फ पुरूष ही नही अनूसूचित वर्ग की महिलाएं भी चुनाव लड़ सकती हैं। इसी तरह 112 पंचायतों को अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
साथ ही 209 पंचायतों को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया जा रहा है, जहां महिलाएं भी दावा ठोंक सकती हैं। जबकि महिलाओं के तय किए सीटों पर पुरूष चुनाव नही लड़ सकते हैं। इसी तरह सामान्य महिलाओं के लिए 226 पंचायतों को आरक्षित किया जा रहा है।
इस सीट पर सभी वर्ग की महिलाएं चुनाव लड़ पाएंगी। इसी तरह महिलाओं के लिए सबसे बड़ा अवसर सामान्य वर्ग के लिए तय किए जाने वाले 469 पंचायतों पर भी है। इन सीटों को सामान्य किया जाएगा और यहां पर पुरूषों का अधिकार नही होगा। महिलाएं भी इन सीटों पर चुनाव लड़ सकेंगी। सबसे अहम बात तो यह है कि इन सीटों पर किसी भी वर्ग की महिला चुनाव लड़ सकेगी। इस तरह महिलाओं के लिए पंचायत चुनाव में बड़ा अवसर है और इसके लिए वह आगे भी आ रही हैँ।
पंचायत चुनाव 2015 से इस बार महिलाओं का दबदबा बढ़ना तय है। पिछली बार तो वैसे की 340 के करीब सीटें ही आरिक्षत हुईं थी। इसके अलावा कुछ सामान्य सीटों पर भी महिलाओं ने जीत हासिल की थी। लेकिन 355 से अधिक सीटों पर महिलाएं नही जीत पाईं थीं।
इस बार तो पहले से ही 409 पंचायतें महिलाओं के लिए तय हैं और वह उन सीटों पर जीत का परचम लहराएंगी। इसके अलावा 469 सामान्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में महिलाएं दावेदारी करेंगी।
50 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की पूरी उम्मीद हैं। वहीं अन्य पिछडा वर्ग की 209 सीटों और अनूसूचित वर्ग के 127 सीटों पर भी उसी वर्ग की महिलाएं भी चुनाव लड़ सकती हैं। इससे पंचायत चुुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय माना जा रहा है।
- सरकारी सेवाओं में शामिल कई लोगों की नजर प्रधान पदों पर टिकी है। वहीं जिला पंचायत सदस्य व प्रमुख जैसे पदों के लिए तैयारी कर रहे दिग्गज नेता भी प्रधान पदों को नही छोड़ना चाहते हैं।
इसमें सरकारी सेवाओं में ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, सफाई कर्मचारी, शिक्षकों के साथ ही दूसरे जिलों में तैनात अधिकारी व कर्मचारी मौका छोड़ना नही चाहते हैं। वह भी अपने घरों की महिलाओं को प्रधान बनवाने के जुगत में हैं। इस बार पंचायत चुनाव काफी रोचक बनता दिख रहा है।