पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश व नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान के करीब पहुंच गया है। नदी में बाढ़ की आशंका को देखते हुए तटवर्ती इलाकों के ग्रामीण दहशत में है। कई गांवों में नदी का पानी घुसने भी लगा है। संभावना जताई जा रही है कि यदि नदी ने लाल निशान पार किया तो सैकड़ों गांव बाढ़ की चपेट में आ जायेंगे।
रविवार को राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से मात्र 10 सेमी नीचे 104.520 मीटर तक पहुंच गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने से जिले में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदी का जलस्तर पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश व नेपाल की ओर से पानी छोड़े जाने के कारण बढ़ रहा है।
नदी में आए उफान के चलते गंगाबक्श भागड़, चौका कलां, चौका खुर्द, जबदहा, जबदही, टेंगनहिया मानकोट, सेमरहना, कटरा शंकरनगर, नरायनपुर मंझारी, रमनगरा तथा मुड़िला नौबस्ता आदि गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ की आशंका से तटवर्ती गांव के लोग डरे हुए हैं।
बेलहा-गौरा मार्ग पर भचकहिया गांव के निकट नदी का पानी सड़क पार कर दूसरी तरफ पहुंच गया है। नरायनपुर मंझारी गांव में पानी घुसने लगा है। कई लोगों के फूस के मकानों में पानी भर गया है।
स्थानीय अनिरुद्ध प्रसाद, घनश्याम, राम स्वरूप, हृदयराम, अतवारी, बेकारु, छोटकने, कमला प्रसाद, धीरज, गिरधारी व माया देवी आदि ने बताया कि गांव के करीब पानी पहुंच गया है। लोगों का आरोप है कि कई बार मांग के बावजूद भी प्रशासन ने कटान रोकने का कोई उपाय नहीं किया। इन लोगों ने गांव को नदी से बचाने की मांग शासन-प्रशासन से की है।
राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 10 सेमी नीचे 104.520 मीटर पर स्थिर हो गया है। संभावना है कि नदी के जलस्तर में अब कमी आएगी। नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। राजस्व अधिकारियों व कर्मियों को क्षेत्र में भ्रमण कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। -गंगाराम गुप्त, एसडीएम-आपदा अधिकारी बलरामपुर