गोंडा। 29 वर्ष से कोतवाली के मालखाने में कैद भगवान श्रीराम, सीता व लक्ष्मण की मूर्तियों को मालखाने से मुक्त कर दिया गया। न्यायालय के आदेश पर मुक्त किए गए तीनों मूर्तियों को पुलिस कर्मियों ने स्नान कराया, नए वस्त्र पहनाए और विधिवत पूजन किया और प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद उसे मंदिर में पुन: प्राण प्रतिष्ठा के लिए भेजा गया।
वर्ष 1964 में कोतवाली करनैलगंज के ग्राम रेवांरी वैशन पुरवा निवासी रामसिंह प्रधान के पूर्वजों ने अपने दरवाजे पर मंदिर का निर्माण करवाया था। जिसमें स्थापित श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता की 32 किलोग्राम की अष्टधातु की मूर्ति स्थापित कर विधिवत प्राण प्रतिष्ठा भी करवाया था, जो लोगों के आस्था का केंद्र बन गया।
श्रद्धालु बराबर मंदिर में पूजन अर्चन करते चले आ रहे थे। फरवरी 1992 की रात तीनों मूर्तियां चोरी कर ले गये। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के कुछ दिन बाद ही मूर्तियों को बरामद कर लिया। मूर्तियों के बरामद करने के बाद उसे मालखाने में रख दिया गया। तब से मंदिर में रहने वाले भगवान मालखाने में कैद हो गये।
अपने पूर्वजों द्वारा बनवाए गए मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर मंदिर में मूर्तियों को पुन: स्थापित कराने की मुहिम राजू सिंह ने तेज की। न्यायालय में पैरवी किया। बीते 5 मई को न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम गोंडा ने मालखाने से मूर्तियों को निकालकर पुन: मंदिर में स्थापित कराने का आदेश पारित किया।
जिसके अनुपालन में दीवान रजनीकांत सिंह व भूपेंद्र सिंह ने मंगलवार को 29 वर्ष बाद माल खाने से मूर्तियों को निकालकर विधिवत स्नान कराया। अंग वस्त्र सिलवा कर पहनाया और श्रद्धा भाव से श्रृंगार, पूजन, भोग, आरती करने के बाद कोतवाली से भगवान की मूर्तियों को मंदिर के लिए रवाना किया। इस मौके पर कोतवाली के सभी पुलिसकर्मी मौजूद रहे।