रक्षाबंधन का त्योहार शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वर्षों की परंपरा को कायम रखते हुए बहनों ने दोपहर बाद अपने भाइयों की कलाई पर राखियां बांधीं। इसके पहले बहनों ने थाल सजाकर भाई की आरती उतारी और हल्दी, कुमकुम व अक्षत लगाकर उनकी कलाई पर राखियां बांधीं।
कच्चे धागे की परंपरा तो अब रही नहीं, लेकिन हैसियत के अनुसार बहनों ने राखियां व मिठाइयां खरीदीं और उसे भेंट किया। भाइयों ने भी बहनों को हैसियत के मुताबिक उपहार दिए। गौरतलब है कि दिन में आज भद्रा नक्षत्र था। करीब दोपहर डेढ़ बजे जैसे ही भद्रा नक्षत्र समाप्त हुआ, बहनों ने राखियां बांधनी शुरू कर दीं।
घरों में रिवाज के अनुसार सावन पूर्णमासी के दिन कथा होती है। लोगों ने सावन के समापन पर कथा सुनकर भगवान शिव को प्रसाद ग्रहण कराया। दुखहरन नाथ मंदिर पर कई लोगों ने सुबह ही पहुंच कर भगवान को राखियां भी चढ़ाईं और अपने परिवार की रक्षा की कामना की।
घरों में लोगों ने ब्राह्मण भोज कराया और दान दिया। राखी का त्योहार पूरे दिन हर्षोल्लास के साथ चलता रहा। लोगों ने एक दूसरे को रक्षाबंधन की बधाइयां भी दीं।