गोंडा। रेलवे ने अधिकारियों व कर्मचारियों की छुट्टी की 170 साल पुरानी व्यवस्था में पहली बार बदलाव किया है। पहली अगस्त से कर्मचारियों और अधिकारियों का अवकाश ऑनलाइन ही मंजूर करने की व्यवस्था की गई है। अब तक मैनुअल अर्जी देकर छुट्टी लेने की परंपरा एक अगस्त से खत्म हो जाएगी।
अब छुट्टी के लिए कर्मचारियों को बाबुओं पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। वह ऑनलाइन ही छुट्टी के लिए आवेदन करेंगे और संबंधित अधिकारी स्वीकृत कर देंगे। इससे जिले के पांच हजार रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। दूसरी ओर रेलवे कर्मचारी इस नई व्यवस्था के विरोध में खड़े हैं, उन्हें पुरानी ही व्यवस्था भा रही है।
रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों व कर्मचारियों की सहूलियत के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल (एचआरएमएस) लागू किया है, जिस पर सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टी का लेखा-जोखा होगा। इतना ही नहीं इस पोर्टल पर कर्मचारी अपने वेतन, ट्रांसफर पोस्टिंग, ट्रेनिंग, वेतन वृद्धि आदि जानकारी भी ले सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना है। कर्मचारी कहीं से भी इस पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं। अब छुट्टी के लिए लिखित आवेदन देने की जगह मोबाइल से ही ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वहीं, कर्मचारियों की कितनी छुट्टी बकाया हैं या पहले कितनी ले चुके हैं, इसकी तमाम जानकारियां इस पोर्टल पर उपलब्ध होंगी।
रेलवे कर्मचारियों को पोर्टल पर अपना पीपीओ नंबर और जन्मतिथि डालनी होगी। इसके बाद उन्हें तमाम जानकारियां पोर्टल पर दिखेंगी। बताया जा रहा है कि रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध होगी। इसके लिए यूजर नेम और पासवर्ड सभी कर्मियों के लिए अलग-अलग होंगे। पोर्टल खोलने या फिर अन्य जानकारियों में रजिस्टर्ड नंबर पर ओटीपी नंबर मांगा जाएगा। इससे डाटा सुरक्षित रहेगा। कर्मचारियों को स्टेशन पर अपनी ड्यूटी छोड़कर अब पर्सनल विभाग में चक्कर नहीं काटने होंगे, इससे उनका समय बचेगा।
रेलवे बोर्ड की एचआरएमएस पोर्टल से छुट्टी व अन्य कार्य की व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया है। गोंडा रेलवे के कर्मचारी इसके विरोध में हैं। उनका आरोप है कि बोर्ड की तरफ से कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। क्योंकि, हजारों कर्मचारी ऐसे हैं, जो सही ढंग से एंड्राइड मोबाइल नहीं चला पाते। ऐसे में इस पोर्टल का विरोध होगा। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के केंद्रीय संगठन मंत्री राम नगीना ने कहा कि बोर्ड के इस निर्णय ने सैकड़ों कर्मचारियों को परेशानी में डाल दिया है। यूनियन जल्द ही उच्च अधिकारियों के सामने आपत्ति जताएगी। मांग की जाएगी कि जब तक सभी कर्मचारियों को ट्रेंड न कर दिया जाए, तब तक इस व्यवस्था को लागू न किया जाए।