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Gonda News: मुंबई में गहरी हुई थी रईस और सलमान की दोस्ती

Tue, 18 Jul 2023 11:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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आईएसआई एजेंट सलमान। - संवाद
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गोंडा। यूपी एटीएस ने तरबगंज के रामापुर के मो. रईस के बाद अब वजीरगंज थाना क्षेत्र के दुवाबा धनेश्वरपुर निवासी मो. सलमान सिद्दीकी को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। रईस और सलमान की मुलाकात गोंडा में एकाध बार हुई थी मगर मुंबई में मकान निर्माण और पुताई करने के दौरान दोनों में दोस्ती गहरा गई और सिलसिला मुल्क से गद्दारी तक जा पहुंचा। दोनों एक-दूजे के पूरक बनकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने लगे। इसके बाद रईस ने सलमान के साथ मिलकर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए अरमान की टीम में और नौजवानों को भी शामिल किया।
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सलमान के पिता मोहम्मद अली बीते 12 जून को मुंबई से घर आए थे। उन्होंने बताया कि 23 नवंबर 2022 को सलमान गांव आया था। 28 को लौट गया था। वह मुंबई के जोगेश्वरी में एक मकान में रहते हैं। जहां वहां चूड़ी बेचने का काम करते हैं। मोहम्मद अली ने बताया कि पांच बेटों में सलमान दूसरे नंबर पर है। पांच साल पहले सलमान मुंबई गया था। जहां चार सौ रुपये दिहाड़ी पर वह काम करता था।
मोहम्मद अली ने बताया कि वह 35 साल से मुंबई में रहकर काम करता था। सलमान की गिरफ्तारी को लेकर कहा कि जिंदगी में जो नहीं हुआ, वह अब सुनना पड़ा। मुल्क से गद्दारी करके सलमान ने गलत किया। इन दिनों के लिए उसे नहीं पाला था। 35 सालों से हम भी काम कर रहे हैं। सलमान को पाला और पढ़ाया-लिखाया। काम सिखाया और काम दिलाया। अब यह सुनकर कुछ कहने को मन ही नहीं कर रहा है। वहीं सलमान की गिरफ्तारी से परिवार के लोग सहमे दिखे। पूरे गांव में भी खलबली है। यूपी एटीएस के आगे के कदम पर लोगों की निगाहें टिकी है।
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मोहम्मद अली के कुनबे में पांच बेटे व एक बेटी है। मोहम्मद अली अपने भाई बुददुर के संग मुंबई में रहकर चूड़ी बेचते हैं। बेटा सलमान में उनके साथ मुंबई में ही रहकर मजदूरी करता था। मोहम्मद अली के दूसरे नंबर का भाई शाहिद रजा मदरसे में पढ़ाता है। तीसरे नंबर का भाई बुददुर मुंबई में रहकर मजदूरी करता है। मोहम्मद अली के बेटों में सबसे बड़ा सद्दाम मनिहार (24), सलमान (22), अरमान (18) व दो अन्य नाबालिग बेटे व एक नाबालिग बेटी है। सद्दाम मदरसे में चार हजार रुपये प्रति माह की पगार पर टीचर है। एक बीघे कृषि योग्य भूमि है, उसमें चारों भाइयों का हिस्सा है। सबकी सामूहिक कमाई से परिवार चलता है। मां हुसैना के साथ सभी बेटे गांव में ही रहते हैं।
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