सूखे की मार झेल रहे किसानों का कोई पुरसा हाल नहीं है। क्रय केंद्रों से धान को अमानक बता कर किसानों को लौटाया जा रहा है। दोहरी मार झेल रहे काश्तकार अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर उपज तैयार करने वाले किसानों का धान नहीं बिक पा रहा है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर धान न बिक पाने से किसान अपना धान बिचौलियों व व्यापारियों को कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर कागजों में खरीद की जा रही है, जबकि किसानों को धान या तो सीधे व्यापारी खरीद रहे हैं या फिर गांव में बिचौलियों के जरिये मंडी पहुंच रहा है।
मजे की बात यह तब है जब जिला अधिकारी की ओर से भी धान खरीद के कड़े निर्देश दिये जाने के साथ ब्लॉकवार धान खरीद की निगरानी करने के लिए अधिकारियों की फौज लगाई जा चुकी है।
धान खरीद न किये जाने के पीछे धान के चावल को एफसीआई के डिलेवरी के मानक के मुताबिक न निकलना बताया जा रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर एक धान खरीद क्रय एजेंसी के खरीद अधिकारी का कहना था कि धान खरीद लेना बड़ी बात नहीं है। उसका बना चावल एफसीआई ले तब तो बात बने। ऐसा न हुआ तो धान खरीद करने वाले को रिकवरी खुद से पूरी करनी होगी।
ऐसे में कोई कर्मचारी धान खरीद कर रिस्क नहीं लेना चाहता। धान व चावल के मानकों में छूट दिये जाने पर ही किसानों के धान की खरीद हो सकेगी।
क्रय एजेंसियां धान की खरीद नहीं कर रही हैं। उनका कहना है कि धान मानक के मुताबिक नही है। वे शासन से डैमेज धान की खरीद करने में छूट दिये जाने का इंतजार कर रहे हैं।
कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में खुले खाद्य रसद विभाग के क्रय केंद्र प्रभारी संजय कुमार शुक्ल का कहना है कि जो धान के नमूने किसान ला रहे हैं, उनका विश्लेषण किया जाता है।
डैमेज अधिक होने के कारण धान की खरीद न करना मजबूरी है। उन्होंने बताया कि धान तो सूखा है, लेकिन दाने टूटे व सफेद अपरिपक्व निकल रहे हैं।
इनसेट
क्वालिटी सही हो तभी खरीद संभव
मंडी परिसर में भारतीय खाद्य निगम का क्रय केंद्र है। केंद्र प्रभारी विजय कुमार अवस्थी ने बताया कि कोई भी धान मानक होने पर ही लिया जाएगा। ऐसा न होने पर चावल की क्वालिटी एफसीआई के मानकों के मुताबिक नही होगी। शासन चावल की डैमेज में छूट देगा तो धान की खरीद हो सकेगी।
धान न बिक पाने से किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि मजबूरी में बिचौलियों व व्यापारियों को 900 से लेकर 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ रहा है।
ग्राम पथवलिया के किसान राम नरेश का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्र से धान का अमानक बता कर लौटा दिया गया तो मजबूरी में मंडी में ही व्यापारी को 1100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ा।
इसी तरह ग्राम भदुआतरहर के किसान शत्रोहन यादव का कहना है कि गेहूं की बोआई के लिए पैसे की जरूरत है। ऐसे में जब क्रय पर धान बेचने गए तो धान को अमानक बता कर लौटा दिया। ऐसे में मुझे मंडी के व्यापारी को 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ा।
सभी क्रय एजेंसियों को किसानों से धान खरीद करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। किसानों से कुछ धान खरीदा गया है। इस साल सब धान का बनने वाला जो चावल है, वह एफसीआई को डिलेवरी वाले मानक पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर पा रहा है। धान व चावल की मानकों में छूट के लिए एफसीआई मुख्यालय को धान का नमूना भेजा गया है। - देवी प्रसाद, रीजनल फूड कंट्रोलर देवीपाटन मंडल