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जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ खुलासा देखिए...

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गोंडा में जनकवि रामनाथ सिंह अदम गोंडवी। फाइल फोटो - फोटो : GONDA
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परसपुर (गोंडा)। ‘जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ खुलासा देखिए, आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये। जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिजाज, उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए।’ अपनी लेखनी से बेरोजगारी, भुखमरी व भ्रष्टाचार पर करारा चोट करने वाले ठेठ गंवई अंदाज के हिंदी साहित्य व गजल विधा के प्रसिद्ध जन कवि व शायर रामनाथ सिंह ‘अदम’ ने अपना सारा जीवन दीन दुखियों, गरीबों, मजलूमों के नाम समर्पित कर साहित्य जगत में जो एक लंबी लकीर खींची है उसकी भरपाई आज शायद ही कोई कर सके। आज अदम हमारे बीच तो नहीं हैं। लेकिन उन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं से लोगों के दिलों में आज भी जिंदा रह कर वें अमर हो गए।
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अदम की रचनाएं इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ बगावत की तहरीर है। अदम ने दुष्यंत के बाद हिंदी गजल विधा को बगावत के स्वर देकर उसे एक नई दिशा, नए आयाम और एक नई मंजिल भी दिया। रामनाथ सिंह ‘अदम’ गोंडवी की 9वीं पुण्य तिथि पर उनके पैतृक गांव आंटा के गजराज पुरवा में उनके नाम से बने अदम गोंडवी प्राथमिक विद्यालय में 18 दिसंबर को श्रद्धांजलि दी जाएगी। उनकी रचनाएं हमेशा लोगों को प्रेरणा देती रहेंगी। अदम ने अपनी रचना में लिखा है ‘कोठियों से मुल्क के मेयार को मत आंकिये, असली हिंदुस्तान तो फुटपाथ पर आबाद है। जुल्फ, अंगड़ाई, तबस्सुम, चांद, आइना, गुलाब, भुखमरी के मोर्चे पर ढल गया इनका शबाब।’ रामनाथ सिंह अदम गोंडवी न केवल साहित्य अपितु धर्म, दर्शन, संस्कृति की शायद ही कोई ऐसी पुस्तक रही हो जिसका उन्होंने अध्ययन न किया हो।
ठेठ गंवई अंदाज की रचनाओं से मिली अलग पहचान
परसपुर (गोंडा)। विकास खंड परसपुर के ग्राम आंटा, गजराज पुरवा गांव में 22 अक्तूबर 1947 को एक किसान परिवार में जन्मे रामनाथ सिंह अपनी कविताओं व रचनाओं से अदम के नाम से मशहूर हो गए। आगे चल कर उन्हें गोंडवी की पदवी प्राप्त हुई और वें अदम गोंडवी बन गए। उनकी ठेठ गंवई अंदाज की रचनाएं उनको कवि सम्मेलनों व मुशायरों में सबसे अलग बनाती थी। उन्होंने महंगाई के बारे में लिखा है। ‘चीनी नहीं है घर में लो मेहमान आ गए, महंगाई की भट्टी पे शराफत उबाल दो’। 18 दिसंबर 2011 को अदम गोंडवी हमेशा के लिये इस दुनिया से रुखसत हो गए। आज वे हमारे बीच तो नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनाएं हमेशा हमें प्रेरणा देती रहेंगी। वे लोगों के दिलो दिमाग पर अपनी जन आकांक्षा की स्मृतियां छोड़ गए। उनकी रचनाएं आज भी समाज को कुरेदती रहेंगी और समाज के लोगों को एक नई दिशा देती रहेंगी।
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‘...मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा खिताबी है’
परसपुर (गोंडा)। अदम गोंडवी की 9वीं पुण्यतिथि पर उनके गांव के पगडंडी की पुरानी यादें आज भी ताजा हो उठतीं है। उन्होंने अपनी रचनाओं में अपने गांव के जिस बदहाली का जिक्र किया था। उसकी दशा लगभग आज भी वैसी ही है। उन्होंने भ्रष्ट व्यवस्था के बारे में अपनी रचनाओं में खुद लिखा था। ‘जो उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में, गांव तक वो रोशनी आएगी कितनी साल में। तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा खिताबी है। आंटा का गजराज पुरवा गांव उस वक्त सुर्खियों में आया था। जब जन कवि व शायर अदम गोंडवी को दुष्यंत पुरस्कार मिला था। अदम ने अपनी रचना में अपने गांव के बारे में लिखा था ‘फटे कपड़ों में तन ढांके गुजरता हो जहां कोई, समझ लेना वो पगडंडी अदम के गांव जाती है।’ उनकी कई रचनाओं की संसद व विधानसभा के अंदर भी खूब गूंज रहती है।
पैतृक गांव में मनाई जाएगी पुण्यतिथि
परसपुर (गोंडा)। अदम गोंडवी के भतीजे दिलीप गोंडवी उनकी विरासत को आज संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि अदम गोंडवी की 9वीं पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव में बने प्राथमिक विद्यालय में उनके समाधि स्थल पर शुक्रवार को 11 बजे मनाई जाएगी। जिसमें उनके परिजन, अदम गोंडवी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक परिषद के लोग, ग्रामवासियों के अलावा अनेक कवि व शायर भी भाग लेंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
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