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कछुआ चाल से हो रही चकबंदी

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गोंडा। जिले में चकबंदी का हाल ये है कि सात साल से 17 गांवों में चकबंदी प्रक्रिया फंसी हुई है। लापरवाही की हद ये है कि गांवों में विवाद तो बढ़ रहे हैं, लेकिन अधिकारी निस्तारण के लिए गंभीर नहीं हैं। भ्रष्टाचार के आरोप अलग से लग रहे हैं। चकबंदी की चाल ने कछुआ की चाल को पीछे छोड़ दिया है। चकबंदी वाले गांवों की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो सात साल में अभी शुरूआती दौर में ही विभाग के अधिकारी और कर्मचारी काम फंसाए हुए हैं। एसओसी के पास दो जिलों का प्रभार है। ऐसे में उनकी व्यस्तता का फायदा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उठा रहे हैं। इस पर प्रशासन ने कड़ा रुख तो अपनाया है, लेकिन चकबंदी विभाग के दांवपेंच दूर करके प्रक्रिया तेज करना इतना आसान नहीं दिख रहा है।
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चकबंदी विभाग भले ही राजस्व विभाग का ही अंग है, लेकिन उसकी पूरी व्यवस्था अलग है। इसी कारण जिन गांवों में चकबंदी शुरू होती है, वहां समिति का गठन होता है। इसमें राजस्व लेखपाल को शामिल किया जाता है। इसके बाद भी चकबंदी प्रक्रिया शुरू होने पर राजस्व लेखपालों को जानकारी नहीं दी जाती है। इससे गांवों में चकबंदी विभाग के कर्मचारी और अधिकारी मनमानी करते हैं। जिन गांवों में चकबंदी चल रही है, वहां कई तरह के खेल होते हैं, जिसमें चक छोड़ने के दांवपेंच होते हैं। कई गांवों में सड़कों के किनारे पट्टी नुमा चक छोड़ा जाता है या फिर तिकोना चक छोड़ते हैं।
इससे किसानों को आगे चलकर दिक्कत होती है। यही नहीं सरकारी भवनों के निर्माण, स्कूल आदि के लिए स्थान गांव से काफी दूर छोड़ने का खेल होता है। जिससे आगे चलकर सरकारी योजनाओं के संचालन में विवाद की स्थिति बनती है। इसके अलावा खेतों की मालियत तय करने और चक तैयार करने की जुगत में प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगता है। यही कारण है कि सात साल से अधिक समय हो गया है और 17 गांवों की चकबंदी अभी शुरूआती प्रक्रियाओं में ही उलझी हुई है। (संवाद)
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चकबंदी के गांवों की स्थिति पर एक नजर
गांव शामिल गाटा प्रचलित प्रक्रिया
धानेपुर 1833 धारा-4
मुजेहना 1021 धारा-4
माधवगंज 1654 धारा-20
विशंभरपुर 2949 धारा-4
ख्वाजाजोत 769 धारा-10
दत्तनगर माफी 1237 धारा-6
त्रिलोकपुर 1156 धारा-24
ढुढाव 1949 धारा-08
पकड़ी कैशवार 491 धारा-27
मलारी 2066 धारा-08
सिसऊर अंदूपुर 1311 धारा-09
तुर्काडीह 588 धारा-27
विशुनपुर बैरिया 802 धारा-10
महेशभारी 902 धारा-23
रानीजोत 741 धारा-10
टिकरिया 862 धारा-27
पहड़वा 428 धारा-27
धाराओं से संचालित प्रक्रिया है चकबंदी
चकबंदी के तहत गांवों में चल रही प्रक्रिया को धारा के तहत आगे बढ़ाया जाता है। जिसमें धारा-4 वाले गांवों में तरमीम की कार्रवाई होती है। इसी तरह धारा-20 वाले गांवों में चक अपील का निस्तारण हो रहा है। धारा-10 वाले गांवों में चक सृजन का कार्य हो रहा है। धारा-6 व 8 वाले गांव में मालियत लग रही है। धारा-24 वाले गांवों में छूटे हुए चक का सीमांकन और इसी तरह धारा-23 वालों में कब्जा परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है। धारा-27 वाले गांवों में अंतिम भू चित्र तैयार हो रहा है। धारा-9 में चकबंदी अधिकारी के स्तर से वाद का निस्तारण हो रहा है। इस तरह अभी 17 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया सात साल से लटकी है।
चकबंदी प्रक्रिया में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तहसील के उपजिलाधिकारियों को भी प्रक्रिया पर नजर रखने के निर्देश दिए गये हैं। विभाग की समीक्षा भी की जा रही है। लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी। डॉ. उज्ज्वल कुमार, जिलाधिकारी
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