अगर ऐसा होता है तो यह न सिर्फ मंडलवासियों के लिए गर्व की बात होगी, बल्कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में एक और जोन का गठन हो जाने से लखनऊ में बैठे पारेषण खंड विभाग के अधिकारियों को भी काफी हद तक राहत मिल जाएगी।
यूपीपीटीसीएल के डायरेक्टर सुशांत अग्रवाल की मानें तो इस संबंध में कोई भी निर्णय निदेशक मंडल की बैठक में ही लिया जाता है। इसलिए जब तक कुछ तय न हो जाए, वह इस बारे में कुछ नहीं बता सकते।
बिजली की लाइनों का जाल बिछाने से लेकर लोगों के घरों तक बिजली पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका ट्रांसमिशन (पारेषण खंड विभाग) की लाइनों की होती है। बड़े-बड़े बिजलीघरों में आने वाली सप्लाई को कम क्षमता की बिजली में कनवर्ट करने के बाद ही इसकी आपूर्ति लोगों के घरों में की जाती है।
इसी के मद्देनजर साल भर पहले देवीपाटन का मुख्यालय होने के नाते प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल ने गोंडा को ट्रांसमिशन का मंडल बनाए जाने का आदेश दिया था। जिसके बाद यहां पहली तैनाती बतौर अधीक्षण अभियंता रविप्रकाश दुबे की हुई थी।
चूंकि पावर कॉर्पोरेशन के चार जोनों में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम में कुल 6 सर्किल (मंडल) और मात्र एक जोन लखनऊ है। जहां से मध्यांचल के अंतर्गत आने वाले छह-छह ट्रांसमिशन मंडलों में होने वाला ट्रांसमिशन लाइन का काम देखा जाता है।
जिसके अंतर्गत 22 जिले आते हैं। ऐसी स्थिति में लखनऊ जोन का बोझ कुछ कम करने के उद्देश्य से देवीपाटन के मुख्यालय गोंडा को ट्रांसमिशन का जोनल कार्यालय बनाए जाने की बात स्थानीय बिजली अधिकारियों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी की मानें तो अभी इस मुद्दे पर किसी तरह का फीडबैक उन्हें उच्चाधिकारियों से नहीं मिला है। लेकिन इसकी चर्चा ऊपर तक है। वहीं यूपीपीटीसीएल के निदेशक सुशांत अग्रवाल भी बताते हैं कि उन्हें इसकी कोई खास जानकारी नहीं है।
ट्रांसमिशन का जोन कार्यालय गठित करने का काम हायर अथॉरिटी का है। इसलिए जब तक उन्हें ऊपर से कोई जानकारी नहीं मिलती वह कुछ नहीं बता सकते। वहीं दूसरी ओर ट्रांसमिशन के अधीक्षण अभियंता रविप्रकाश दुबे का कहना है कि उड़ती-उड़ती यह खबर उनके पास भी आई है। लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो वक्त ही बताएगा।
अगले साल पावर ग्रिड से जुड़ जाएगा गोंडा
गोंडा में भले ही बिजली के उत्पादन के लिए कोई पावर प्लांट न लगा हो, लेकिन अगले साल टांडा एनटीपीसी की ग्रिड से जुड़ जाने के बाद गोंडा गैर जिलों को बिजली का निर्यात जरूर करने लगेगा। इसके लिए तरबगंज के लौव्वाटेपरा में 400 केवी क्षमता के बिजलीघर का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। निर्माण कर रही संस्था आईसोलेस के लोगों की मानें तो वर्ष 2016 में बिजलीघर पूरी तरह से चालू हो जाएगा।