गोंडा। जिले में बांस बल्ली के सहारे संचालित बिजली सप्लाई की व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ गई है। बिजली विभाग की उदासीनता के चलते जिले के सैकड़ों मजरों में आज भी जर्जर हो चुके बांस-बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है।
सालों पहले लगाए गए लकड़ी के पोलों से तार ले जाए गए हैं। जर्जर पोल कब धराशायी हो कर किसी बड़े हादसे का सबब बन जाए, इसे लेकर क्षेत्रीय लोग भयभीत हैं।
विद्युत वितरण खंड गोंडा, मनकापुर,करनैलगंज व तरबगंज के सौ से अधिक मजरों में जुगाड़ के सहारे बिजली सप्लाई दी जा रही है। गांवों के इन मजरों में बिजली के कनेक्शन तो दे दिये गये लेकिन घरों तक बिजली जुगाड़ के सहारे ही पहुंचाई जा रही है।
ग्रामीण स्थानीय लाइनमैन के सहयोग से बांस के पोल के सहारे केबल अपने घरों तक ले जा रहे हैं। मुजेहना ब्लाक के ग्राम पंचायत राजापुर के पठान पुरवा में आज भी ग्रामीणों को बांस-बल्ली के सहारे ही बिजली आपूर्ति मिल रही है।
यहां के करीब 100 घरों में बिजली आपूर्ति जगह-जगह बांस बल्ली लगाकर हो रही है। ग्रामीणों के लगाए बांस के तमाम पोल सड़ चुके हैं, जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। पोल पर बिछाए गए केबिल तार काफी नीचे आ चुके हैं जिससे राहगीरों की सुरक्षा को भी खतरा बना रहता है।
क्षेत्र के दर्जनों गांवों में आज भी विभाग इन्हीं जर्जर बांस-बल्ली के पोलों के सहारे आपूर्ति कर रहा है। उपभोक्ताओं से नियत समय पर बिल की वसूली के लिए विभाग अभियान तो चलाता है लेकिन लोगों की समस्याएं निस्तारित करने में कोई दिलचस्पी नहीं लेरहा।
इतना ही नहीं कई बार लोगों ने विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग भी की है लेकिन विभाग अफसर इसे अनसुना किए हैं। वही एसडीओ प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि मामले की जांच कराकर सभी कनेक्शन धारकों की सुरक्षा व सुविधा का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
जिले में जर्जर तार व खंभो के सहारे सप्लाई दी जा रही है जिससे हल्की सी बारिश होते ही हजारों गांवो की कई घंटो तक बिजली गुल हो जाती है। बारिश शुरू होने से पहले ही बिजली सप्लाई रोक दी जाती है। लेकिन बरसात बंद होने के कई घंटो के बाद भी बिजली आपूर्ति चालू नही हो पाती।
शुक्लगंज उपकेंद्र के भवन का निर्माण वर्ष 2011 मे कराया गया था लेकिन दस सालों में ही भवन की जर्जर स्थित होने से हल्की से बरसात में भी छत से पानी टपकना शुरू हो जाता है। बरसात का पानी पूरे कमरे में फैल जाता है जिससे बड़ी घटना घटित हो सकती है ।
वहीं भवन के दरवाजे भी टूट गए है । खिड़की के शीशे व दरवाजे भी नहीं है । यहां से पच्चीस हजार उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति की जाती है । उपकेंद्र के भवन की स्थिति इतनी जर्जर है कि कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है।
कोट्स
-सौभाग्य योजना के तहत लगभग सभी गांवों में विद्युत पोल व केबल लगे हैं। विभाग की ओर से बांस बल्ली के सहारे कनेक्शन देेने की कोई व्यवस्था ही नही है।
-रणवीर सिंह, एक्सईएन पावर कार्पोरेशन