आर्यनगर में पोल पर तार खींचते विद्युत कर्मी। स्रोत: विभाग
गोंडा। आंधी-बारिश के 20 दिन बाद भी देवीपाटन मंडल के 58 गांवों और मजरों में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में क्षतिग्रस्त बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए करीब तीन हजार कर्मचारी जुटे हैं। जलभराव और खेतों में खड़ी फसलों के बीच टूटे खंभे खड़े करने और बिजली लाइनों की मरम्मत का काम जारी है।
देवीपाटन जोन के मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ के अनुसार, 24 से 27 सितंबर के बीच आई आंधी-बारिश से चारों जिलों में बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा था। कई जगह खंभे उखड़ गए और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। 13 अक्तूबर तक 4,665 प्रभावित गांवों में से 4,607 में बिजली आपूर्ति बहाल की जा चुकी थी। शेष 58 गांवों और मजरों में आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार यादव ने बताया कि डुमरियाडीह समेत कई क्षेत्रों में जलभराव और खेतों में खड़ी फसलों के कारण मरम्मत कार्य में दिक्कत आ रही है। क्षतिग्रस्त लाइनों तक पहुंचने और वहां संसाधन ले जाने में समय लग रहा है। इसके बावजूद टीमें लगातार काम कर रही हैं। डुमरियाडीह के राम खेलावन और पंकज कुमार ने बताया कि बिजली न आने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आपूर्ति बहाली में जुटे 3000 कर्मचारी
बिजली आपूर्ति बहाल करने के अभियान में करीब 2,500 संविदा व निविदा कर्मचारी और 500 विभागीय कर्मचारी और अधिकारी तथा 60 से अधिक कार्यदायी संस्थाओं की टीमें लगी हैं। पर्व और छुट्टियों में भी मरम्मत का काम जारी रहा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्य अभियंता नरेश कुमार ने सोमवार देर शाम इस्माइलपुर गांव की दलित बस्ती का निरीक्षण किया। उन्होंने बस्ती में जल्द ट्रांसफार्मर लगवाने का आश्वासन दिया।