गोंडा। तरबगंज थानाक्षेत्र के पकड़ी गांव में छह साल पहले हुए दलित बुजुर्ग रमई की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) नासिर अहमद ने वादी, उसके पुत्र, विवेचना के दौरान प्रकाश में आए चार आरोपियों व एफआईआर में नामजद तीन आरोपियों का पॉलीग्राफ व नार्को टेस्ट कराने का आदेश दिया है। जबकि असहमति जताने पर अदालत ने विवेचक की ओर से प्रस्तुत चश्मदीद गवाह के पॉलीग्राफ व नार्को टेस्ट कराने का आवेदन निरस्त कर दिया है।
बता दें कि रमई हत्याकांड का पर्दाफाश करने में तरबगंज थाने की पुलिस नाकाम रही थी। इसके बादमामले की विवेचना अपराध अनुसंधान विभाग, सीआईएस, सीबीसीआईडी गोरखपुर को सौंपी गई। विवेचक अपराध अनुसंधान विभाग गोरखपुर के अपर पुलिस अधीक्षक निवेश कटियार ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें मुकदमे की वादी सुंदरपती (रमई की पत्नी), बेटे राजकुमार, आरोपी विरेंद्र कुमार सिंह उर्फ गुड्डू, उसके भाई विवेक कुमार सिंह उर्फ पप्पू, हनुमान दूबे, राजेंद्र पांडेय व नामजद राधेश्याम दूबे, उसके बेटे विष्णुशंकर, मोहर अली और चश्मदीद गवाह विटाना के पाॅलीग्राफ व नार्को टेस्ट कराने की अनुमति मांगी। चश्मदीद गवाह को छोड़कर सभी ने पाॅलीग्राफ व नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति दे दी।विटाना का कहना था कि वह रक्तचाप से पीड़ित होने के कारण कभी-कभी बेहोश हो जाती हैं।
जानिए क्या थी वारदात
चार जून 2017 की रात पकड़ी निवासी दलित रमई को जमीन विवाद में गोली मार दी गई थी। लखनऊ में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। वारदात में मृतक की पत्नी सुंदरपती ने राधेश्याम दूबे, विष्णुशंकर दूबे, कलूट व मोहरअली के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। करीब साढ़े सात साल के दौरान 14 बार जांच अधिकारी बदले गए। विवेचक ने पकड़ी के प्रधान विवेक कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह,उनके भाई वीरेंद्र कुमार सिंह उर्फ गुड्डू सिंह, मरगूबपुर के प्रधान पति राजेंद्र पांडेय उर्फ तितर व हनुमान दूबे निवासी पकड़ी को दलित रमई की हत्या को आरोपी बनाया है।