गोंडा। कदम कदम पर कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की दहशत पंचायत चुनाव में तैनात मतदान कार्मिकों को परेशान कर रही है। बीमारी के बावजूद चुनाव ड्यूटी से राहत दिलाने की गुहार सुने बिना ही अधिकारी कार्रवाई का डर दिखा कर दोहरी परेशानी दे रहे हैं।
पंचायत चुनाव के लिए मतदान व मतगणना कार्य के लिए जिले के 18 हजार से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों को जुटाया गया है। दूसरी तरफ कोरोना के भय के बीच ही आला अफसर भी बस किसी तरह मतदान से लेकर मतगणना तक की तैयारियों को अंतिम स्वरूप देने में जुटे हैं।
जिले के मुजेहना में एक प्रधान पद प्रत्याशी के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के बाद हुई मौत ने प्रत्याशियों से लेकर चुनाव ड्यूटी से जुड़े कर्मचारियों तक को दहशत में ला दिया है। ब्लाक मुख्यालयों से मतदान के लिए मतदाता टोलियां 18 अप्रैल को रवाना होनी हैं।
मतदान कार्मिकों के प्रशिक्षण में जिस तरह कोरोना प्रोटोकाल की अनदेखी की गयी उससे भी कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका पहले से ही जतायी जाने लगी है। इसके चलते ही पोलिंग पार्टियों की रवानगी के दिन सोशल डिस्टेसिंग का पालन कराना प्रशासनिक अमले के लिए बड़ी चुनौती होगा। इसके चलते ही कई ग्राम पंचायतों में तो मतदाताओं ने पंचायत चुनाव की तिथियों को आगे बढ़ाने तक की मांग प्रशासन से उठाना शुरू कर दिया है।
चुनाव जीतने का जोश इस कदर प्रत्याशियों पर हावी है कि वह कोरोना के खतरे को ही दर किनार किए हैं। चुनाव प्रचार में कोरोना प्रोटोकाल का पालन दूर की कौड़ी बना है। प्रत्याशियों पर नकेल कसे बिना कोविड प्रोटोकाल का पालन संभव नजर नहीं आ रहा। सीएमओ डा. अजय सिंह गौतम भी मानते हैं कि कोरोना के खतरे से निपटने को सभी को एकजुटता के साथ मिलकर ही लड़ना संभव होगा।