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शायरों ने पढ़ीं रचनाएं

Sun, 09 Aug 2015 11:42 PM IST
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
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बज्मे अदब फाउंडेशन द्वारा मोहम्मद यूसुफ उस्मानी इंटर कॉलेज में शनिवार की रात अली सरदार जाफरी के नाम एक काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। गोष्ठी में कवि व शायरों ने अपनी रचनाएं पढ़कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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काव्य गोष्ठी का शुभारंभ पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता सरदार अली जाफरी को श्रद्घांजलि अर्पित करते हुए किया गया। काव्य पाठ का आगाज करते हुए सुजा उतरौलवी ने शेर पढ़ा कि- वो नाम जिससे मेरी रूह को करार आए, जुबां पर मेरे वही नाम बार-बार आए।

शकील ने शेर सुनाया कि- जो अमीरों के तरफदार हुआ करते हैं, हां वो इमदाद के हकदार हुआ करते हैं। राज उतरौलवी ने काव्य पाठ करते हुए फरमाया कि- सबसे पहले लब पे उसका नाम आना चाहिए, फिर यकीनन रूह को आराम आना चाहिए।
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उस्मान ने शेर सुनाया कि- कसमकस में पड़ी रह गई बेअमल जिंदगी रह गई, मैंने दरिया को ठुकरा दिया तशनगी देखती रह गई। हरदीप सिंह दीपक ने काव्य पाठ करते हुए सुनाया कि- सुनकर यह अच्छा लगता है जब कोई पागल कहता है, क्यों होती प्यार की रस्में प्रश्न यहीं मन में उठता है।

डॉक्टर जफर ने शेर पढ़ा कि- एक सुगंध एक खुशबू जो भी नाम दो मुझको, मैं यहीं हूं सदियों से और रहूंगा सदियों तक। गोष्ठी में जमील अहमद, अनुज सरोज व फरीद आदि ने भी अपनी रचनाएं पढ़कर लोगों से खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर अब्दुल रहमान, इसरार, शमशाद, डॉ. एहसान, डॉ. नजर मोहम्मद एवं डॉ. सगीर सहित तमाम प्रबुद्घजन मौजूद रहे।
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