गोंडा। बदलते मौसम का असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। बच्चे उल्टी-दस्त व बुखार की चपेट में आ रहे हैं। इससे मेडिकल कॉलेज का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेनसिव केयर यूनिट) वार्ड 10 दिन से फुल चल रहा है। एक सप्ताह में 87 बच्चों को भर्ती कर उपचार किया गया।
भीषण गर्मी व उमस की वजह से बच्चे डायरिया व डिहाइड्रेशन का शिकार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओपीडी में हर रोज 230 से अधिक बच्चों का उपचार किया जाता है। रोज औसतन 12 बच्चों को भर्ती करना पड़ता है।
चिल्ड्रेन वार्ड में 20 व पीआईसीयू में 10 बेडों पर मरीज भर्ती किए जाते हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण पीआईसीयू से बच्चों को जल्द डिस्चार्ज करना पड़ रहा है ताकि नए गंभीर बच्चे को बेड मिल सके। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि इस समय उल्टी-दस्त, बुखार व पेट दर्द से पीड़ित बच्चे ओपीडी में आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आफताब आलम ने बताया कि बच्चे की बीमारी का सबसे बड़ा कारण बोतल का दूध है। यदि बच्चे को सेहतमंद रखना है तो मां को स्तनपान कराना चाहिए। बाहर का दूध पिलाते समय कटोरी-चम्मच का उपयोग करें क्योंकि बोतल के निप्पल वाले हिस्से में बैक्टीरिया जम जाते हैं जो सामान्य गर्म पानी से धोने पर भी नहीं मरते बल्कि 130 डिग्री सेल्सियस खौलते पानी में 25 मिनट तक उबालने पर बैक्टीरिया मरते हैं। बच्चों को अधिक मात्रा में पानी पिलाएं। दस्त आने पर ओआरएस व जिंक का घोल पिलाएं।