गांवों में नजर रखने का भी निर्देश दिया गया है। विदित हो कि आगामी दिनों में होने वाले पंचायत चुनावों की सरगर्मी गांव के चौपालों में पूरी तरह से दिखने लगी है। प्रधान तथा उनके समर्थक विरोधियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ इस बार के चुनाव में जीत की गणित बिठाने में संभावित प्रत्याशी भी पूरी तरह से मुस्तैद दिख रहे हैं। एक दूसरे की कमियां व कमजोरी ढूंढने का प्रयास गांवों में तेज हो गया है।
साथ ही साथ जातीय व अन्य समीकरण भी तेजी से उभरने लगे हैं। लोग एक दूसरे को पटखनी देने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में तनाव व गुटबाजी होना संभावित है।
पुलिस यदि सक्रिय नहीं रही तो चुनावी रंजिश को लेकर घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। थानों में चुनावी रंजिश को लेकर एक दूसरे के खिलाफ शिकायतें करने का सिलसिला भी बढ़ गया है। हालांकि पुलिस अभी इन शिकायतों को रुटीन शिकायत मान रही है।