गोंडा। वजीरगंज के कोंडर में जन्मे महर्षि पतंजलि ने दुनिया को सबसे पहले योग का दर्शन दिया था। उनकी जन्मस्थली के सौंदर्यीकरण व विकास पर 1.30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। तरबगंज विधायक प्रेमनरायन पांडेय की मांग पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए थे। इधर, पर्यटन विभाग ने बजट स्वीकृत कर निर्माण की प्रक्रिया शुरु कर दी है।
इस स्थान पर महर्षि पतंजलि का छोटा सा मंदिर बना है। वर्तमान में जन्मस्थली उपेक्षा की शिकार है। महर्षि पतंजलि का जन्म 200 ईसा पूर्व जिले के वजीरगंज इलाके प्रसिद्ध ग्रंथ महाभाष्य में महर्षि का जन्मस्थान कोंडर बताया गया है। यह स्थान भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या के करीब है। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में आने वाले इस स्थान का पौराणिक महत्व है।
जीर्णोद्धार से प्रकाश व्यवस्था तक का काम शामिल
- पर्यटन विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्धार से लेकर प्रकाश व्यवस्था तक का कार्य शामिल है। सौंदर्यीकरण के तहत महर्षि की जन्मस्थली पर बने पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार, धर्मशाला निर्माण व मंदिर के चारों तरफ बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जायेगा। पक्की सड़क से मंदिर तक सीसी रोड का निर्माण होगा। कोडर नदी के तट पर पक्के घाट का निर्माण भी होगा। प्रकाश के लिए सोलर लाइट भी लगाई जायेगी।
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शेषनाग के अवतार माने जाते हैं महर्षि पतंजलि
महर्षि पतंजलि को शेषनाग का अवतार माना जाता है। महर्षि पतंजलि पर्दे के पीछे रहकर अपने शिष्यों को योग की शिक्षा देते थे। बताते हैं कि एक बार सभी शिष्य योग कर रहे थे तो एक शिष्य ने उत्सुकतावश उसे पर्दे को हटा दिया। इसके बाद शेषावतार महर्षि पतंजलि के मुंह से निकली फुफकार से सभी शिष्य जलकर भष्म हो गए। एक शिष्य उठकर अलग चला गया था जब वह लौटा तो अपने सभी सहयोगियों को मृत पाया। बाद में इसी शिष्य को महर्षि ने पूरी योगविद्या सौंप दी और खुद अंतरध्यान हो गए।
योजना को मिली मंजूरी
महर्षि पतंजलि के जन्मस्थान कोंडर के विकास की योजना को मंजूरी मिली है। पर्यटन विभाग ने प्रक्रिया शुरु कर दी है। इसके अलावा अभी और कार्य यहां कराए जाएंगे।
- प्रेमनरायन पांडेय, विधायक तरबगंज