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पंडित को मिला कैबिनेट का पुरस्कार

Sat, 31 Oct 2015 10:06 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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साढ़े तीन साल पहले जब समाजवादी पार्टी की सत्ता आई तो जिले में चारों कील कांटे दुरुस्त थे। जिले के दिग्गज एक ही मंच पर थे, लेकिन इसके बाद ऐसा बिखराव हुआ कि अब केवल एक ही व्यक्ति के इर्दगिर्द पूरी सत्ता व पार्टी की राजनीति सिमट गई है। पहले सांसद बृजभूषण शरण सिंह, इसके बाद सपा में कैबिनेट मंत्री रहे कुंवर आनंद सिंह तथा अंत में योगेश प्रताप सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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अब सदर से विधायक विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह को कैबिनेट मंत्री का पुरस्कार मिल गया। इसी के साथ चेक एंड बैलेंस की राजनीति भी खत्म हो गई है।

बीते कई दशकों से जिले की राजनीति के सिरमौर रहे कुंवर आनंद सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, उमेश्वर प्रताप सिंह फिर उनके पुत्र योगेश प्रताप सिंह तथा करनैलगंज से कई बार विधायक रहे अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भइया सत्ता के मुख्य धुरी रहे हैं।

2012 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की विजय हुई तो उस समय कुंवर आनंद सिंह, सांसद बृजभूषण शरण सिंह, सांसद कीर्तिवर्धन सिंह, योगेश प्रताप सिंह और विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह एक मंच पर थे।
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बृजभूषण शरण सिंह कैसरगंज से सांसद थे। कुंवर आनंद सिंह गौरा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर जीत कर कैबिनेट मंत्री बने थे और उनके पुत्र पूर्व सांसद कीर्तिवर्धन सिंह भी सपा में ही थे।

बीते लोकसभा चुनाव के ठीक पहले बृजभूषण शरण सिंह ने मोदी लहर की आहट को भांप कर कैसरगंज से सपा के सांसदी का टिकट वापस कर भाजपा का दामन थाम लिया और वह फिर सांसद बन गए।

उधर अपने पिता कुंवर आनंद सिंह की गोद से निकल कर कीर्तिवर्धन सिंह ने अपना रास्ता बदला और भाजपा का दामन थाम लिया। इसमें पुत्र के भगवा प्रेम के चक्कर में कुंवर आनंद सिंह को कैबिनेट मंत्री पद से हटना पड़ा।

कुंवर आनंद सिंह व कीर्तिवर्धन सिंह से बेहतर रिश्ते होने के नाते योगेश प्रताप सिंह को भी बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया गया।

जिले में सात में से छह विधायक सपा के हैं। इसमें एक मात्र ब्राह्मण विधायक नंदिता शुक्ला हैं। तीन बार विधायक बनने वाली नंदिता शुक्ला को शुरू से ही यहां के लोग मंत्री बनाने की मांग करते रहे।

इसके पहले पांच बार मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल में भी उन्हें जगह नहीं मिली। इस बार जब पंडित सिंह को कैबिनेट मंत्री का तोहफा मिला तो फिर यह बात गलियारों में गूंजने लगी कि ब्राह्मणों को दरकिनार किया गया है।

2017 को लेकर सत्ता से बेदखल किए गए लोगों के ध्रुवीकरण की बात अब खुलकर होने लगी है। पहले से ही इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि यदि पंडित सिंह कैबिनेट मंत्री बने तो अंदरखाने उबाल आएगा।

पंडित सिंह कैबिनेट मंत्री तो बन गए लेकिन योगेश को बाहर का रास्ता दिखा कर यहां की सुलगती राजनीति में आग में घी डालने का काम हुआ है।

सीएमओ अपहरण कांड हो या व्यापारी आकाश अग्रवाल को धमकी देने की बात। पंडित सिंह ऐसे विवादों व दबंगई के लिए मशहूर रहे हैं। विवादों से नाता होने के बावजूद अखिलेश सिंह यादव ने पंडित सिंह को कैबिनेट मंत्री का पुरस्कार दे दिया।
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