चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि से जिले के 1054 ग्राम पंचायतों में कराया जाने वाला विकास कार्य कार्ययोजना के अभाव में ठप हो गया है। अब तक जिले के 360 ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना ही प्लान प्लस पर फीड कराई जा सकी है, जबकि 694 गांवों की कार्ययोजना ब्लाकों पर धूल फांक रही है।
ऐसे में जब तक सभी ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना फीड नहीं होगी तब तक न किसी गांव की वर्क आईडी जनरेट होगी न ही कार्य होगा। इस तरह जिले की 1054 ग्राम पंचायतों का ही विकास कार्य ठप हो गया है। कार्ययोजना तैयार कर उसे फीड कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे पंचायत सचिवों की इस लापरवाही से वित्तीय वर्ष 2016-17 में अवशेष धनराशि के रुप में आवंटित 44 करोड़ रुपये ग्राम पंचायतों के खातों में डंप हैं और इस योजना से कराये जाने वाले कामों पर ब्रेक लग गया है।
चौदहवें वित्त आयोग के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 में जिले की 1054 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को कराये जाने के लिए भारत सरकार की तरफ से दो किश्तों मे 1.08 अरब रुपये की धनराशि का आवंटन किया गया था। पहली किश्त के रुप में आवंटित किए गए 64 करोड़ रुपये तो ग्राम पंचायतों ने खर्च कर दिए, लेकिन बाद में भेजी गई 44 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त की कार्ययोजना नहीं तैयार हो सकी और यह धनराशि पंचायतों के खातों में डंप रह गई।
जिले के अफसरों ने इसकी कार्ययोजना तैयार करने के लिए 22 से 28 अप्रैल तक सभी ग्राम पंचायतों में खुली बैठक का आयोजन कर कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया था। इस पर ग्राम पंचायतों में खुली बैठक तो जैसे तैसे करा ली गई, लेकिन न तो इसकी कार्ययोजना ही बन सकी और न ही प्लान प्लस पर इसकी फीडिंग ही कराई जा सकी।
12 जून तक 1054 ग्राम पंचायतों में से महज 360 गांवों की कार्ययोजना ही प्लान प्लस साफ्टवेयर पर फीड हो सकी है, जबकि 694 गांवों की कार्ययोजना पंचायत सचिवों की लापरवाही से ब्लाकों पर धूल फांक रही है। इस लापरवाही से इन 994 गांवों में तो विकास कार्य रुका ही है इसके अलावा जिन गांवों की कार्ययोजना की फींडिग हो चुकी है उन गांवों में भी विकास के कार्य ठप पड़े हैं। अपने ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना की फीडिंग करा चुके ग्राम प्रधानों का कहना है कि इस लापरवाही के कारण उनकी गांवों का काम भी रुक गया है।
चौदह वित्त आयोग के नियमों के तहत गांवों में विकास कार्यो को कराने से पहले गांवों में खुली बैठक का आयोजन कर विकास कार्यों की कार्ययोजना तैयार किए जाने का निर्देश है। इसके बाद उसे प्लान प्लस साफ्टवेयर पर फीड कराया जाता है।
सरकार की तरफ से निर्देश है कि जब तक दो तिहाई से अधिक गांवों की कार्ययोजना की फीडिंग प्लान प्लस सॉफ्टवेयर पर नही हो जाती तब तक उस गांव की वर्क आईडी जेनरेट नहीं की जा सकती। ऐसे में जिन गांवों की कार्ययोजना फीड भी हो गई है वहां कोरम पूरा न होने के अभाव में वर्क आईडी जनरेट नही हो रही है। ऐसे में फीडिंग करा चुके गांवों में भी विकास का पहिया रुका हुआ है।