गोंडा। पंचायत चुनाव 2015 में चुनाव लड़ने वाले 41849 प्रत्याशियों की चार करोड़ के करीब की जमानत धनराशि निर्वाचन विभाग ने जब्त कर ली है। जिला पंचायत सदस्य के तीन प्रत्याशियों को छोड़कर किसी भी प्रत्याशी ने चुनावी खर्च का न तो हिसाब दिया और न ही जमानत राशि वापसी के लिए आवेदन ही किया। अब इन प्रत्याशियों की जमानत राशि वापस नहीं होगी।
16 विकास खंडों के 1044 पंचायतों के प्रधान पदों के लिए 2015 में हुए चुनाव में 9451 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे। इसमें अनारक्षित वर्ग के साथ ही आरक्षित वर्ग के भी प्रत्याशी शामिल हैं।
अनारक्षित वर्ग के प्रत्याशियों को दो हजार और आरक्षित वर्ग के प्रत्याशियों के लिए एक हजार जमानत राशि जमा करनी थी। प्रधान पद के लिए प्रत्याशियों की ओर से एक करोड़ 4 लाख 6500 रुपये जमा किए गए थे, पांच साल बीतने को है किसी ने भी जमानत राशि वापस नहीं ली।
इसी तरह 13136 पंचायत सदस्यों के पदों के लिए हुए चुनाव में 22988 लोग मैदान में उतरे थे। सदस्य पद के लिए 500 जमानत राशि थी, 80 लाख 45 हजार 800 जमा हुए थे। इसी तरह 51 जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए 830 प्रत्याशियों ने 29 लाख पांच हजार जमानत राशि जमा किए।
1240 क्षेत्र पंचायत सदस्य के पद पर 8580 लोगों ने ताल ठोकी थी। बतौर जमानत राशि के रूप में एक करोड़ 30 लाख जमा किए। इसमें से भी किसी ने धनराशि वापस नहीं लिया। निर्वाचन विभाग के सहायक अधिकारी नारायण कहते हैं कि जिला पंचायत सदस्यों के तीन प्रत्याशियों ने व्यय विवरण जमा करके जमानत राशि वापस ली थी। उन्होंने कहा कि अब जमानत राशि जब्त कर ली गई है।
जिले में 1995 से पांच बार हुए पंचायत चुनावों में करीब दो लाख से अधिक प्रत्याशियों ने भाग्य अजमाए। जमानत राशि में तो परिवर्तन होता रहा, लेकिन चुनाव लड़ने वालों ने जमानत राशि वापस लेने को गंभीरता से नहीं लिया।
निर्वाचन विभाग के जानकारों की मानें तो पांच बार के चुनावों की ही बात करें तो दो लाख से अधिक लोग चुनाव लड़े। इन लोगों की ओर से अलग-अलग चुनावी वर्षों में 9 करोड़ से अधिक की जमानत राशि जब्त हो चुकी है। अब आने वाले पंचायत चुनाव 2021 में चुनाव लड़ने वालों के तरीकों पर सभी की निगाहें टिकीं हैं।
पंचायत चुनावों में खर्च की सीमा तो तय है, लेकिन व्यय का विवरण न देने पर कोई कार्रवाई की व्यवस्था नहीं है। विधान सभा व लोक सभा चुनावों में खर्च का विवरण न देने पर चुनाव लड़ने पर रोक की व्यवस्था है।
पंचायत चुनाव में ऐसी कोई व्यवस्था न होने से प्रत्याशी गंभीरता से नहीं लेते हैं। ऐसा तब है जब जमानत राशि वापस लेने के लिए कोई अधिक झंझट नहीं है। अपने चुनाव परिणाम के साथ ही जमानत राशि की रसीद और एक दस के स्टांप पर खर्च का विवरण देना है। इसके बाद जमानत राशि वापस मिल जाती है।