गोंडा। पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से पंचायत भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। कहीं बाउंड्रीवॉल नहीं बनी तो कहीं कमजोर और कामचलाऊ छत बनाकर रकम निकाल ली गई। मगर जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामले में देवीपाटन मंडल के उपनिदेशक पंचायत ने डीपीआरओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि पंचायत भवनों के निर्माण में बड़े पैमाने पर सरकारी रकम की बंदरबांट हुई है।
देवीपाटन मंडल के उपनिदेशक पंचायत गिरीश चंद्र ने 2018-19 से 2022-23 के बीच वजीरगंज के माथेपुर, नगवा, मुजेहना के राजापुर पसौरा, इटियाथोक के पृथ्वीपालगंज ग्रंट, इटियाथोक के बिरमापुर और करनैलगंज के रेक्सड़िया समेत कुल छह पंचायत भवन चिह्नित किए हैं। इन पंचायतों में स्थानीय स्तर पर तमाम तरह की सुविधाएं देना तो दूर इनका भवन निर्माण ही पूरा नहीं हो सका है। जबकि पांच वर्ष से अधिक समय बीत चुका है।
आरोप है कि इन भवनों के निर्माण में रकम बंदरबांट कर ली गई। इनकी बाउंड्रीवाल के साथ ही छत की भी गुणवत्ता में खामियां हैं। घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। खिड़की और गेट तक अधूरे पड़े हैं। बाहर से रंग-रोगन कर रकम निकाल ली गई। इसके बावजूद जिला पंचायतीराज अधिकारी ने जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है है। मामले में डीपीआरओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिले में पंचायत भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत 69 के सापेक्ष महज 10 का निर्माण ही पूरा हुआ है। 59 पंचायत भवनों का निर्माण अधूरा पड़ा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि रुपईडीह ब्लॉक के पंचायत भवनों में सबसे अधिक वित्तीय अनियमितता बरती गई है। इसके बावजूद जांच कर कार्रवाई के बजाय अफसर और कर्मचारी लीपापोती में जुटे हुए हैं।