लॉ इज द किंग आफ किंग्स एंड मोर पावरफुल दैन द किंग। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खुद को बहुत ताकतवर मानते थे। लेकिन कोर्ट ने उसकी कुर्सी लेकर उसे पैदल कर दिया। भारत में जिस समय इमरजेंसी लगी थी, उस वक्त भी न्यायपालिका की भूमिका बड़ी अहम थी। क्योंकि यह न्यायपालिका ही है, जो गरीब से गरीब व्यक्ति को इंसाफ दिलाती है। बशर्ते उसे इंसाफ दिलाने वाले अधिवक्ता वादी, फरियादी की सही तरीके से पैरवी करें।
यह बात शनिवार को वेंकटाचार्य क्लब में आयोजित मंडलीय अधिवक्ताओं की एक कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कही। इस दौरान उन्होंने वकालत की भाषा में कोट किए जाने वाले कई अंग्रेजी शब्दों का व्याख्यान करते हुए उसकी परिभाषा बताई।
साथ ही अधिवक्ताओं को कोर्ट (न्यायालय) का आफीसर बताते हुए वादी, फरियादी को सही समय पर इंसाफ दिलाए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि फरियादी को अगर सही समय पर न्याय नहीं मिलता है और तारीख पर तारीख लगती चली जाती है, तो उसे इंसाफ मिलना न मिलने के बराबर हो जाता है।
कहा कि चाहे संविधान निर्माता बाबा साहब हों या फिर डा. राजेन्द्र प्रसाद जैसे अन्य लोग, वह सभी अधिवक्ता का व्यवसाय एक नोबेल प्रोफेशन की तरह करते थे। उन्होंने कहा कि देश में न्यायपालिका सबसे बड़ी है। यह न्यायपालिका ही है जिसने खुद को सबसे ज्यादा ताकतवर मानने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कुर्सी ले ली और उन्हें पैदल कर दिया।
इस दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक व वरिष्ठ अधिवक्ता दीपनारायण पाण्डेय, बार एसोसिएसन के अध्यक्ष केके मिश्र, गोविंद शरण पाण्डेय, शमीम अतहर के अलावा गोडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह, कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह, अधिवक्ता इंद्रजीत के अलावा तमाम लोगों ने संवैधानिक शासन व्यवस्था में न्यायपालिका व अधिवक्ताओं की भूमिका पर अपने विचार रखे।