बालपुर (गोंडा)। यूरोप में हुए विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए छह सैनिकों के सम्मान में गुरुवार को शौर्य दिवस मनाया गया। छह करोड़ यूरोपीय सहित 7 करोड़ से अधिक सैनिकों ने युद्ध में प्रतिभाग किया था। इसमें गोंडा के 29 सैनिकों ने भाग लिया था जिसमें छह सैनिक शहीद हो गए थे।
वर्ष 1914 में हुए प्रथम विश्व युद्ध में विकास खंड हलधरमऊ के गड़ियागाड़ा गांव के 29 लोगों ने महात्मा गांधी के आह्वान पर भाग लिया था। जिसमें लड़ाई के दौरान छह सैनिक शहीद हो गये थे। इसी गांव के रामधीरज सिंह द्वितीय विश्व युद्ध 1945 में शहीद हो गए थे। इन वीर सपूतों के सम्मान में अंग्रेज सरकार ने गांव के बाहर शौर्य स्तंभ बनवाया था।
गुरुवार को भाजपा नेता पूर्व प्रधान राममूर्ति सिंह की अगुवाई में शहीद स्थल पर 106वीं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि क्षेत्राधिकारी करनैलगंज मुन्ना उपाध्याय ने शौर्य स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर अमर शहीदों को याद किया। पूर्व प्रधान राममूर्ति सिंह ने बताया कि इस स्थल पर चार स्तंभ बनाए गए हैं। ये गांव व जिले की पहचान के साथ युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
तीसरा स्तंभ भारत सरकार ने देश आजाद होने के बाद 1949 में राजेश्वर सिंह के सम्मान में बनवाया जो 1937 में अंग्रेज सरकार से बगावत कर गाजीपुर के जमनिया पर तिरंगा फहरा दिया था। जिनको बाद में केंद्र सरकार ने सीओ पद से नवाजा था।
चौथा स्तंभ 1992 में इसी गांव के सपूत अशोक सिंह के सम्मान में बनवाया गया जो परसपुर गोली कांड में शहीद हुए थे। गुरुवार को क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने वीर सपूतों को याद किया। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राजू ओझा, चौकी प्रभारी बालपुर सुनील तिवारी, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रमेश सिंह, अनुपम सिंह, तिलक राम सिंह, लल्लू तिवारी, विजय पाल सिंह, उदय प्रताप सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।