यूपी के गोंडा में इंजेक्शन से नशा ले रहे 476 की आदत छुड़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ओएसटी सेंटर (ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी) खोलने का निर्णय लिया है। यहां पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए अलग से नोडल अधिकारी की तैनाती की जाएगी।
नशा मुक्त समाज की स्थापना को लेकर उप्र राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी ने लक्षित हस्तक्षेप परियोजना के तहत सेंटर की स्थापना को लेकर तैयारी की है। इसके लिए स्थल की तलाश की जा रही है। यहां पर ऐसे लोगों का पंजीकरण किया जाएगा, जो इंजेक्शन से नशा करते हैं। नशे करने वाले लोगों का इलाज करने के साथ ही काउंसिलिंग भी की जाएगी। इसके साथ ही दवाओं का एक खुराक तय किया जाएगा।
476 मरीजों का आंकड़ा विभाग को मिला
यह लोगों को वितरित किया जाएगा। ताकि उन्हें नशे के लिए इंजेक्शन न लेना पड़े। लक्षित परियोजना से अब तक 476 मरीजों का आंकड़ा विभाग को मिला है। इसके आधार पर तैयारी की जा रही है।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जय गोविंद ने बताया कि सेंटर की स्थापना के लिए प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा जा रहा है। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।
नशा मुक्त समाज की स्थापना का है प्रयास
दिशा यूनिट के क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर विजयकांत शुक्ला का कहना है कि ओएसटी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें ओपिओइड पर निर्भर इंजेक्शन से नशीली दवाओं का सेवन करने वालों को मनोवैज्ञानिक-सामाजिक हस्तक्षेप के साथ-साथ चिकित्सकीय देखरेख में लंबे समय तक प्रभावकारी ओपिओइड एगोनिस्ट दवाएं दी जाती हैं।
एक ही इंजेक्शन का प्रयोग करके लेते हैं नशा
ओएसटी का उद्देश्य नशीली दवाओं के उपयोग के प्रतिकूल स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों को कम करना है, भले ही उपयोगकर्ता अल्पावधि में सभी नशीली दवाओं का उपयोग बंद न कर सके या न करना चाहे। नशीली दवाएं, जो लोग इंजेक्शन के द्वारा लेते हैं, वह लेते समय एक ही इंजेक्शन का प्रयोग करते हैं। जिससे एड्स के प्रसार का खतरा रहता है। इसी को समाप्त करने एवं नशे की लत को छुड़ाने के लिए यह दवा विकसित की गई है। इसके तहत ओएसटी की स्थापना की जा रही है।