गोंडा। बेसिक स्कूलों के 3.68 लाख बच्चों को ठंड में स्वेटर देने की योजना भी जांच के दायरे में आ गई है। जिले में 8 करोड़ से स्वेटर खरीद की टेंडर प्रक्रिया वर्ष 2020 में हुई थी। माह अक्टूबर में स्वेटर खरीद की प्रक्रिया पूरी करके वितरण कराया गया।
स्वेटर खरीद की प्रक्रिया की अब जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह को सौंपी गई है। मामले की जांच कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह की शिकायत पर हुई है। सांसद ने प्रक्रिया के दौरान भी शासन से शिकायत की थी।
स्कूलों के बच्चों को स्वेटर देने के लिए पहले स्कूल प्रबंध समिति से वितरण की कार्रवाई होती थी। बाद में शासन ने वितरण के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से ठेके देने का फैसला लिया। दो वित्तीय वर्षों में स्वेटर वितरण की कार्रवाई ठेके के माध्यम से हुई।
ठेके से स्वेटर वितरण कराने की व्यवस्था पर बड़े-बड़ों ने दांवपेंच शुरू कर दिए। बीते साल 2020 में स्वेटर खरीद के लिए हुई प्रक्रिया में पहले लोगों को टेंडर जमा करने से ही रोका गया। बाहरी लोगों ने दबाव बनाया तो कई लोग अपने नमूने जमा नहीं कर पा रहे थे।
बाद में शासन से शिकायत होने पर नगर मजिस्ट्रेट बीएसए दफ्तर पहुंची और निगरानी में नमूने जमा कराए। उस समय काफी तनातनी के बीच 148 रुपये प्रति स्वेटर की दर से एक संस्था को वितरण का कार्य आवंटित हुआ।
स्वेटर वितरण में एक करोड़ 41 लाख के करीब की बजत करके विभाग ने वितरण कराया। अब कैसरगंज सांसद ने स्वेटर वितरण की खरीद प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने पहले भी शिकायत की थी। फिलहाल मामले की जांच शुरू हो गई है।
बेसिक शिक्षा में कार्य मुक्ति में धन उगाही के मामले ने तूल पकड़ा तो स्वेटर प्रकरण फिर चर्चा में आ गया है। स्वेटर मामले में कैसरगंज सांसद ने पहले भी जांच कराने के लिए बेसिक शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा था और बीएसए की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की थी।
सांसद ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए 16 अक्टूबर 2020 को ही अपने पत्र में गंभीर आरोप लगाए थे। टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुई उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम कानपुर को टेंडर शामिल करने में नियमों की अनदेखी की बात कही।
इसके अलावा स्वेटर वितरण करने वाली जिले की एक संस्था को को अस्वीकृत करने की कार्रवाई को भी नियमों के विपरीत बताया था। आशंका जताई थी कि बीएसए अपने चहेते व्यक्ति को स्वेटर वितरण का टेंडर देना चाहते हैं। शिकायत के बाद भी टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई। अब मामले की जांच में इन बिंदुओं की पड़ताल भी होनी है।