गोंडा। परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश ने पति की उपेक्षा से परेशान पत्नी और एक साल की अबोध बेटी को छह हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।
कोतवाली नगर क्षेत्र के बुधई पुरवा गिर्द गोंडा निवासी मंतशा ने 16 दिसंबर 2022 को फैमिली कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि नौ मार्च 2019 को मुस्लिम रीति-रिवाज से उनका निकाह कुर्ला रोड, अंधेरी, मुंबई निवासी समीउद्दीन अंसारी से हुआ था। दोनों के संसर्ग से पुत्री इनाया का जन्म हुआ तो पति का व्यवहार बदल गया। उन्होंने बेटी के साथ मंतशा को मायके भेज दिया। इसके बाद वह न तो हाल खबर ले रहा है और न ही भरण पोषण के लिए पैसा दे रहा है। मंतशा ने स्वयं व बेटी के भरण पोषण के लिए पति से 30 हजार रुपये प्रतिमाह दिलाने की मांग की। अदालत के नोटिस का तामीला होने के बावजूद समीउद्दीन अंसारी हाजिर नहीं हुआ। इस पर अदालत में एकपक्षीय कार्रवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान वादिनी के अधिवक्ता की ओर से की गई बहस, साक्ष्य और परिस्थितियों को देखते हुए प्रधान न्यायाधीश रीता गुप्ता ने समीउद्दीन अंसारी को पत्नी मंतशा के भरण पोषण के लिए प्रतिमाह चार हजार और बेटी इनाया के भरण पोषण के लिए प्रतिमाह दो हजार रुपये देने का आदेश दिया है। अदालत के आदेशानुसार भरण पोषण भत्ता की धनराशि प्रत्येक माह की सात तारीख को दी जाएगी।