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Gonda News: कुरासी गांव में 15 और लोग उल्टी दस्त से बीमार

Tue, 30 Jul 2024 01:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। खरगूपुर के कुरासी गांव में उल्टी दस्त से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद दहशत का माहौल है। गांव के 15 लोग उल्टी दस्त से पीड़ित हैं। ये सभी विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। गांव में स्वास्थ्य टीमों से डेरा डालकर सोमवार को घर-घर क्लोरीन व ओआरएस के पैकेट वितरित किए। वहीं, मेडिकल कॉलेज में डायरिया के लक्षण वाले 16 मरीजों को भर्ती किया गया है।
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कुरासी में सुशील कुमार शुक्ल का परिवार उल्टी दस्त से पीड़ित है। शुक्रवार शाम सुशील कुमार शुक्ल (30) व शनिवार को उनकी बेटी शिव देवी उर्फ मिस्टी (01) की मौत हो गई थी। रविवार को सुशील की मां शीला देवी (62) की भी इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। सुशील की पत्नी रीता और दो बेटियों का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। सोमवार को तीनों की हालत में कुछ सुधार हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को कुरासी गांव में शिविर लगाकर बीमार लोगों का उपचार किया। उन्हें दवाएं दीं। टीम के डॉ. शिवकुमार ने बताया कि गांव के 15 अन्य लोग उल्टी, दस्त व पेट दर्द से पीड़ित हैं। इनमें गांव के हसनैन (2), शामता प्रसाद (53), आंचल (13), रेखा (40) अटल बिहारी शुक्ल (52), सुशीला देवी (65) आदि को उल्टी, दस्त के साथ ही बुखार है। इन सभी का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
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वहीं, भीषण गर्मी के कारण उल्टी दस्त का प्रकोप पूरे जिले में फैला हुआ है। महाराजा देवी बख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय की इमरजेंसी में पिछले 24 घंटे में 16 लोगों को भर्ती कराया गया। इनमें खिराभा के सीताराम (75), चढ़निया बूढ़ादेवर निवासी अलीमुननिशा (73), पूरे उदई के अनिकेत (03), पूरे उदई की अनुष्का (2), अशोकपुर बंजरिया के कृष्ण गोपाल (10 माह), सकरौरा पूर्वी की अनीता मिश्रा (40), कुतुबगंज बाजार की अन्नपूर्णा (13), खान देवरिया की मनोरमा (27), भवानीपुर के अभिनंदन सोनकर (5), इटियाथोक की शाहीन बानो (24) आदि शामिल हैं। इन सभी का उपचार किया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के ईएमओ डॉ. दीपक सिंह ने बताया कि बार-बार उल्टी दस्त आना, पेट दर्द, बुखार आदि डायरिया के लक्षण हैं। पानी की कमी होने से त्वचा में सिकुड़न होने लगती है। छोटे बच्चों की आंखें धंसने लगती हैं। डायरिया होने पर पीड़ित को ओआरएस का घोल लगातार पिलाते रहें। ओआरएस न होने पर नमक और चीनी का घोल बनाकर पिलाएं। छोटे बच्चों को डायरिया होने पर दूध न पिलाएं। मौसमी या रसीले फलों का सेवन करें।
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