गोंडा। ग्रामीणों को राजस्व संबंधी सेवाएं गांव में ही उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक जुलाई से ग्राम सचिवालयों में लेखपालों के बैठने की व्यवस्था लागू करने का आदेश पहले दिन ही कागजी साबित हुआ। राजस्व परिषद के निर्देश के बावजूद अधिकांश ग्राम सचिवालयों में न तो लेखपाल पहुंचे और न ही तहसीलों से समय पर रोस्टर जारी हो सका। इस दौरान कई पंचायत भवनों पर ताले लटके मिले, जबकि कुछ स्थानों पर लेखपाल अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त दिखाई दिए। इससे ग्रामीणों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
पंचायत भवनों पर लटके मिले ताले
तरबगंज तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत किशुनदासपुर में बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे पंचायत भवन बंद मिला। यहां तैनात लेखपाल बलवंत गुप्त ने बताया कि उन्हें ग्राम सचिवालय में बैठने का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसी तरह ग्राम पंचायत मैनपुर में दोपहर दो बजे तक पंचायत भवन पर ताला लटका मिला। लेखपाल दिनेश यादव ने कहा कि अभी तक कोई स्पष्ट निर्देश या रोस्टर नहीं मिला है।
सचिवालय के बजाय स्कूल में करते मिले काम
सदर तहसील के इटियाथोक क्षेत्र स्थित पूरे दतई गांव में पंचायत भवन के बजाय प्राथमिक विद्यालय में लेखपाल प्रशांत कुमार वर्मा और पंचायत सहायक रोहित कुमार कनौजिया फार्मर रजिस्ट्री सहित अन्य कार्य करते मिले। लेखपाल ने बताया कि ग्राम सचिवालय में बैठने संबंधी रोस्टर की कोई जानकारी नहीं दी गई है। आदेश मिलने पर सचिवालय में बैठकर काम करेंगे।
कहीं पहुंचे, तो कहीं अनुपस्थित रहे लेखपाल
करनैलगंज तहसील के बेलमत्थर पंचायत भवन में लेखपाल अजय कुमार फार्मर रजिस्ट्री का कार्य करते मिले, लेकिन उन्होंने भी रोस्टर की जानकारी न होने की बात कही। वहीं मथुरा और उड़िला ग्राम पंचायतों में तैनात लेखपाल मौके पर नहीं मिले। उनका कहना था कि तहसील स्तर से अभी तक कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
अधिकारियों ने दी अलग-अलग दलील
एसडीएम सदर जितेंद्र गौतम ने दावा किया कि रोस्टर जारी कर दिया गया है और लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं एसडीएम करनैलगंज नेहा मिश्रा ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री और अंश निर्धारण का विशेष अभियान चलने के कारण लेखपाल नियमित रूप से सचिवालय में नहीं बैठ पा रहे हैं। रोस्टर तैयार कराया जा रहा है। एसडीएम तरबगंज प्रदीप सिंह ने कहा कि ग्राम सचिवालयों का विवरण मांगा गया है, जिसके बाद रोस्टर जारी किया जाएगा।