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तीन गुना बढ़ा संस्थागत प्रसव, 15200 नवजातों की गूंजी किलकारी

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फोटो-3-गोंडा के महिला अस्पताल में सिजेरियन करने के बाद डॉ. सुवर्णा कुमार। -संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला महिला अस्पताल के लेबर वार्ड में संस्थागत प्रसव की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ है। कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर में लोग अस्पताल जाने से बच रहे थे वहीं संक्रमण के तीसरी लहर में इससे उलट नार्मल और सिजेरियन प्रसव में इजाफा हुआ है। एक अप्रैल 2021 से लेकर 31 मार्च 2022 तक जिला महिला अस्पताल में 4500 प्रसव का लक्ष्य रखा गया था, उसके सापेक्ष विगत एक वर्ष में 15,200 प्रसव करवाया गया। जिसमें 5100 से अधिक सिजेरियन प्रसव मेें अन्य नार्मल प्रसव के शामिल हैं। सुरक्षित प्रसव में मामले में जिला महिला अस्पताल को प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
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फटी बच्चेदानी का ऑपरेशन कर बचाई जान
जिला महिला अस्पताल में पिछले एक साल में पांच सौ से अधिक जटिल ऑपरेशन कर गर्भवती महिलाओं की जान बचाई गई। लोगों का संस्थागत प्रसव के प्रति विश्वास बढ़ा है। महिला अस्पताल में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार ने बताया कि ऐसी महिलाओं का सुरक्षित प्रसव करावाया, जिनकी बच्चेदानी फटी थी, तथा इंफेक्शन फैलने का खतरा बन गया था। उन्होंने बताया कि 18 जनवरी 2022 को कोतवाली नगर के गोरागंज निवासी प्रियंका देवी को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला अस्पताल लाया गया। गर्भवती का ब्लड प्रेशर नहीं मिल रहा था। सांस भी फूल रही थी।
डॉक्टर को बच्चेदानी फटने का शक हुआ। अल्ट्रासाउंड जांच करवाई गई। बच्चेदानी में खून भी भरा था। डॉक्टर ने इमरजेंसी में ऑपरेशन कर जान बचाई। डॉ. सुवर्णा ने बताया कि जटिल ऑपरेशन कर शिशु को बाहर निकाला गया। बच्चेदानी को दुरुस्त किया गया ताकि वह भविष्य में मां बन सके। इसी प्रकार 18 जनवरी को परसपुर के नीरजा सिंह का आपेशन कर चार किलो का ट्यूमर निकाला गया। वहीं ऐसे ही कई जटिल ऑपरेशन कर गर्भवती महिलाओं की जान बचाई गई। (संवाद)
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अस्पताल में पिछले एक साल में लक्ष्य के करीब तीन गुना सुरक्षित प्रसव कराया गया। एक अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 तक 15200 गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया। अस्पताल में किसी गर्भवती या धात्री महिला को असुविधा न हो इसके लिए डॉक्टरों व कर्मियों की जिम्मेदारी तय की गई है। डॉ. सुषमा सिंह, सीएमएस
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