सुरक्षा की मांग पर अड़े चिकित्सक, कोतवाली में इलाज की दी चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। कोलकाता की घटना के विरोध में चल रहे रेजिडेंट डॉक्टरों के आंदोलन में थोड़ी शिथिलता बरती गई। बुधवार को आंदोलनकारी डॉक्टरों ने दरी पर बैठकर मरीजों का उपचार किया। वहीं परामर्शदाता व वरिष्ठ परामर्शदाताओं ने ओपीडी में बैठकर मरीजों का इलाज किया।
महाराजा देवीबख्श सिंह राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रेजिडेंट डॉक्टरों का आंदोलन नौवें दिन भी जारी रहा, लेकिन मरीजों को बिना उपचार के नहीं लौटना पड़ा। बुधवार को 1312 मरीजों का पंजीकरण हुआ, जिसमें 415 मरीजों को वरिष्ठ चिकित्सकों ने जबकि 897 मरीजों का उपचार धरने पर बैठे जूनियर व सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने जमीन पर बैठकर किया। वहीं वार्डों में भर्ती मरीजों की देखरेख की जिम्मेदारी स्टॉफ नर्स व पैरामेडिकल के इंटर्न छात्रों ने संभाली।
एक साथ भीड़ उमड़ने से अफरातफरी
चिकित्साधीक्षक के कक्ष के सामने 18 डॉक्टरों ने जमीन पर बैठकर एक साथ ओपीडी शुरू कर दी। जिससे एक ही स्थान पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी और अफरातफरी का माहौल हो गया। पहले दिखाने के चक्कर में मरीजों में आपसी झड़प भी देखने को मिला। धरना स्थल पर उपचार करने वालों में डॉ. राकेश पांडेय, डॉ. रमेश पांडेय, डॉ. आयुषी सरदाना, डॉ. निहारिका द्विवेदी व डॉ. श्रृति गुप्ता आदि शामिल रहे।
डॉक्टरों ने दी कोतवाली में इलाज करने की चेतावनी
सुरक्षा की गारंटी देने की मांग पर अड़े डॉक्टरों ने पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कोतवाली में ओपीडी व इमरजेंसी शुरू करने की चेतावनी दी है। डॉक्टरों ने कहा कि वह इस असुरक्षित माहौल में मरीजों का उपचार नहीं कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में अस्थायी पुलिस चौकी की व्यवस्था कराई जाए, नहीं तो 48 घंटे बाद नगर कोतवाली व एसपी कार्यालय पर दरी बिछाकर मरीजों का इलाज किया जाएगा।