गोंडा। जिले में पशु चिकित्सा व्यवस्था डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। 35 राजकीय पशु चिकित्सालयों में पशु चिकित्साधिकारियों के 32 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 12 चिकित्सक ही तैनात हैं। 20 पद खाली हैं।
विभाग में कुल 236 पदों के सापेक्ष महज 94 कर्मचारी ही कार्यरत हैं और 142 पद रिक्त हैं। इसका असर पशुपालकों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं पर पड़ रहा है। कहीं डॉक्टर नहीं मिलते तो कहीं जर्जर भवनों में अस्पताल संचालित हो रहे हैं। कई पशु सेवा केंद्र कर्मचारी न होने से बंद पड़े हैं।
करनैलगंज तहसील में स्थिति सबसे खराब है। डिप्टी सीवीओ डॉ. खिलाड़ी शंकर के पास पांच अस्पतालों का चार्ज है। नहवापरसौरा समेत करीब 90 प्रतिशत अस्पतालों और सेवा केंद्रों के भवन जर्जर हैं। कर्मचारी न होने से नहवापरसौरा और मैजापुर पशु सेवा केंद्र बंद हैं।
छपिया के परसा तिवारी पशु चिकित्सालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सोनू पाठक ही मिले। उन्होंने बताया कि चिकित्सक डॉ. आशीष सिंह के पास चार अन्य अस्पतालों का भी प्रभार है।
कहीं छत का प्लास्टर टूट रहा, कहीं डॉक्टर नहीं
तरबगंज के राजकीय पशु चिकित्सालय में पानी और साफ-सफाई की समस्या मिली। भवन की छत का प्लास्टर भी टूटकर गिर रहा है। बृहस्पतिवार को खजुरी निवासी मुकुट सिंह अपनी गाय का इलाज कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि गाय को किलनी लगी थी। भानपुर निवासी शत्रुहन सिंह भैंस के चारा न खाने की समस्या लेकर पहुंचे, लेकिन चिकित्सक नहीं मिले। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने उन्हें दवा दी। परेड सरकार ग्राम पंचायत के बनकटाचार्यगंज पशु सेवा केंद्र पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। भवन भी जर्जर था। डिप्टी सीवीओ डॉ. आरके तिवारी ने बताया कि यहां पशुधन प्रसार अधिकारी दिनेश आर्या तैनात हैं। उनके पास पशुधन विकास परिषद का भी चार्ज है। परसपुर पशु चिकित्सालय में फार्मासिस्ट अतुल कुमार मौर्य इलाज करते मिले। वहीं मुजेहना के राजकीय पशु चिकित्सालय में चिकित्सक कक्ष पर ताला लटका मिला। आवासीय भवन भी जर्जर हालत में है।
निजी स्तर पर कराना पड़ता है इलाज
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में साढ़े पांच लाख से अधिक पशुओं की देखभाल की जिम्मेदारी है। इसके लिए 236 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 94 पर कर्मचारी तैनात हैं। 142 पद रिक्त हैं। करीब 70 भवनों में 60 के जर्जर होने की बात सामने आई है। पशुपालकों का आरोप है कि कई मामलों में चिकित्सक फोन पर निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने की सलाह देते हैं। डॉक्टर और फार्मासिस्ट की कमी के कारण टीकाकरण और उपचार व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। पशुपालकों को कई बार निजी स्तर पर इलाज कराना पड़ता है।
सभी अस्पतालों के नियमित खुलने का दावा
सीवीओ डॉ. शशि कुमार शर्मा ने बताया कि सभी पशु चिकित्सालय नियमित रूप से खुल रहे हैं और पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। जिले में आठ मोबाइल वेटनरी वैन और 1962 पशु एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध है।
बदहाल पड़े राजकीय पशु चिकित्सालय। संवाद
बदहाल पड़े राजकीय पशु चिकित्सालय। संवाद