शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज मैदान में श्रीराम कथा में मौजूद श्रोता। स्रोत: आयोजक
गोंडा। पिता की आज्ञा मानना बड़ा धर्म है। जमदग्नि के कहने पर परशुराम ने अपनी मां का गला काट दिया। पुरु ने पिता की आज्ञा पर अपना यौवन त्याग दिया। इसलिए पिता की इच्छा के अनुरूप तुम अयोध्या का राज स्वीकार करो। गुरु वशिष्ठ द्वारा इस प्रकार से दिए गए अनेक तर्कों को भरत ने यह कहते हुए मर्यादा पूर्वक नकार दिया कि धर्म विरुद्ध आदेश नहीं मानना चाहिए, चाहे वह पिता या गुरु का ही क्यों न हो। ये बातें महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज परिसर में कहीं।
श्रीमहाकाल भक्त परिवार के संयोजन में आयोजित कथा में शुक्रवार को वह भरत चरित्र की कथा सुना रहे थे। प्रवाचक ने कहा कि गुरु वशिष्ठ ने भरत को अनेक तर्क देकर अयोध्या की सत्ता संभालने को कहा। मगर भरत ने कहा कि परशुराम ने आज्ञापालन के बाद जमदग्नि से वरदान मांगकर मां को जीवित किया। ये दर्शाता है कि आदेश पालन के बाद भी वह पिता के आदेश से सहमत नहीं थे। राजा ययाति ने पुरु से यौवन प्राप्त किया, जो बेटे के प्रति पिता के धर्म का खुला उल्लंघन और स्वार्थपूर्ण कार्य था। कोई पिता अपनी अनियंत्रित कामवासना के लिए पुत्र का यौवन प्राप्त करने की कैसे सोच सकता है। भरत ने कहा कि पिता जी ने भी मंत्री सुमंत्र से राम को रथ से वन दिखा लाने को कहा था, किंतु राम ने भी शास्त्र-विरुद्ध होने से पिता का यह आदेश अस्वीकार कर दिया। भरत ने तर्क दिया कि भक्त प्रह्लाद ने पिता की और राजा बलि ने गुरु शुक्राचार्य की आज्ञा इसलिए नहीं मानी, क्योंकि वे शास्त्र-सम्मत नहीं थीं।
प्रवाचक ने कहा कि भगवान राम ने छोटे भाई भरत के लिए राज त्यागकर वनगमन किया। भरत ने बड़े भाई का राज्य ग्रहण करने के बाद उनकी पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर कठोर तप किया। आजकल संपत्ति के लिए भाई-भाई पर जानलेवा हमले कर रहे हैं। इस मौके पर अश्वनी शुक्ल, बैजनाथ दूबे, जन्मेजय सिंह, एनएस भदौरिया, विपिन तिवारी, प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव, दिनेश शुक्ल, रामकुमार यादव, श्रीनिवास शुक्ल, राजीव रस्तोगी आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।