कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक करते राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के सदस्य डॉ. अफरोज अहमद। - संवाद
गोंडा। करनैलगंज में सरयू नदी के घाट के एक किलोमीटर दायरे में एकसाथ नौ प्रजातियों के कछुए पाए जा रहे हैं। ऐसे में इस क्षेत्र को हर हाल में संरक्षित किया जाए। मिलों के आसपास अधिक पेड़ लगाए जाएं। ताकि मिलों से निकले अपशिष्ट व घरों, अस्पतालों और नगरों से निकला गंदा पानी तालाब व नदियों में जाने से रोका जाए। तालाब को अतिक्रमण मुक्त रखने के साथ ही अवैध ईंट-भट्ठे बंद कराए जाएं। ये बातें एनजीटी की प्रधान न्यायपीठ नई दिल्ली के जज डॉ. अफरोज अहमद ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने डीएम के अभियान व लक्ष्य से 101 फीसद पौधरोपण को लेकर वन विभाग की तारीफ भी की।
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि साफ पानी होने के कारण सरयू में एकसाथ नौ प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अपने लक्ष्य 48,54,000 के सापेक्ष 101 प्रतिशत पौधरोपण किया गया है। डीएम नेहा शर्मा की पहल पर राजमार्ग के डिवाइडर पर बड़ी संख्या में पौधे रोपे गए हैं। जस्टिस डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि कछुआ को संरक्षित करने के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर पहल की जाए। सरयू घाट के किमी. दायरे को संरक्षित किया जाए। कोई ऐसा काम होना चाहिए जो जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सके। बैठक में डीएम नेहा शर्मा, एसपी अंकित मित्तल, सीडीओ एम. अरुन्मोलि, डीएफओ पंकज शुक्ल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ठाकुरजी पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार और रवींद्र कुमार पांडेय मौजूद रहे।
जस्टिस डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि ठोस कचरा, प्लास्टिक कचरा, बायो मेडिकल कचरा, औद्योगिक कचरा, ई-वेस्ट वायु, जल, ध्वनि, डोमेस्टिक सीवेज, खनन एवं निर्माण कार्य आदि के प्रदूषण का निस्तारण बेहतर ढंग से किया जाए। प्रदूषण प्रबंधन में टेक्नोलॉजी का उपयोग, बड़ी संख्या में पौधरोपण के साथ नदियों, झीलों, तालाबों व वनों का संरक्षण करना होगा। खाली जमीनों पर पौधरोपण कराया जाए। सभी स्कूल कॉलेज, कार्यालय, हॉस्पिटल में पौधारोपण किया जाए। पंचायतों में बायोडायवर्सिटी पार्क भी बनाएं।