गोंडा जिले में 306 मदरसे बिना पंजीकरण के ही संचालित हो रहे हैं। ये खुलासा मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में हुआ है। ऐसे में नेपाल के सीमावर्ती देवीपाटन मंडल के बहराइच, श्रावस्ती व बलरामपुर जिलों में मदरसों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की भी आशंका है। इसके चलते खुफिया एजेंसियों ने गोंडा के साथ ही इन जिलों में भी सक्रियता बढ़ा दी है। उ.प्र. आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) एक-एक मदरसे की हाई लेवल मॉनीटरिंग और स्क्रीनिंग कर रहा है। एटीएस ने अभिसूचना, नागरिक पुलिस और अल्पसंख्यक विभाग से भी इन मदरसों का ब्योरा तलब किया है।
गोंडा जनपद में कुल 518 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हो रहे हैं। जहां 46,528 बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं। ये बच्चे अल्पसंख्यक विभाग के यू-डायस पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इसके अलावा पिछले महीनों में मदरसा शिक्षा परिषद के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने अवैध तरीके से संचालित मदरसों का सर्वे कराया था। इनमें 306 मदरसे बिना पंजीयन के संचालित पाए गए। इसके बाद यूपी एटीएस को भी सक्रिय कर दिया गया है। पिछले दिनों आतंकी गतिविधियों में शामिल जिले के कई संदिग्धों के पकड़े जाने से गोंडा पर पहले से ही एटीएस की नजर है।
गोपनीय सूत्रों का दावा है कि सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद नेपाल सीमा से जुड़े बहराइच, बलरामपुर व श्रावस्ती पर भी यूपी एटीएस की नजर बनी हुई है। आशंका है कि इन अवैध मदरसों से देशविरोधी गतिविधियां संचालित हो रहीं हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के साथ ही एटीएस भी कोई चूक नहीं करना चाहती। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से इन मदरसों की डिटेल खंगालने के बाद अपने स्तर से जानकारी जुटा रहा है। ऐसे में जल्द ही संदिग्ध गतिविधियों वाले मदरसों पर एटीएस के साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग भी कोई बड़ी कार्रवाई कर सकता है।
सर्वे में बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों की भूमि व संचालकों का पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है। वजीरगंज, परसपुर, रुपईडीह व तरबगंज समेत अन्य ब्लॉकों में कई ऐसे मदरसों के संचालकों का पता ही नहीं चल पाया है। इतना ही नहीं ये मदरसे निजी या किराये के भवन अथवा सरकारी भूमि पर संचालित किए जा रहे हैं? इसकी भी पूरी तरह से जानकारी नहीं मिल पा रही है। हालांकि कुछ मदरसे 1985 या उससे पहले से भी संचालित हो रहे है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी व इन मदरसाें के संचालकों ने पंजीकरण कराना जरूरी नहीं समझा। जानकार बताते हैं कि जांच होने पर कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। ऐसे में जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग अब सख्त हो गया है। जल्द ही टीम गठित कर अपंजीकृत मदरसों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो सकती है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रमेश चंद्र ने बताया कि मदरसा शिक्षा परिषद के निर्देश पर कराए गए सर्वे में 306 मदरसे बिना पंजीयन के संचालित मिले हैं। एटीएस ने भी इन मदरसों की पूरी डिटेल मांगी है। बिना पंजीकरण के संचालित मदरसों पर जल्द विभागीय कार्रवाई की जाएगी।