इमरजेंसी में आने वाले एक फोन कॉल पर जहां आज लोगों को घर बैठे एंबुलेंस मुहैया हो जाती है तो वहीं एंबुलेंस की ही तर्ज पर मरीजों को कोई जांच एक जिले से दूसरे जिले में जाकर बाहर से न करानी पड़े, इसके लिए प्रदेश सरकार ने महीने भर पहले ट्रायल बेसिस पर सूबे के 39 सरकारी अस्पतालों में शुरू की गई उस पैथालॉजी जांच को पूरी क्षमता के साथ बहाल रखने का निर्णय लिया है, जिसका पेंच अभी तक प्रदेश सरकार की अनुमति न मिलने के कारण फंसा हुआ था।
इन अस्पतालों में गोंडा जिला अस्पताल भी शामिल है, जहां एसआरएल लैब मरीजों की 150 प्रकार की पैथालॉजी जांच कर रही है। सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्त ने बताया कि प्रदेश सरकार ने महीने भर पहले ट्रायल बेसिस पर शुरू की गई पैथालॉजी जांच सेवा को एक जनवरी से लागू कर दिया है।
गत वर्ष चार दिसंबर को अमर उजाला ने माई सिटी में ‘एक रुपये के पर्चे पर होंगी खून की 150 तरह की जांचें’ शीर्षक से इसकी खबर भी प्रकाशित की थी। जिसमें जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को विश्वस्तरीय पैथालॉजी जांच की सेवा मुहैया होने का हवाला दिया गया था।
लेकिन इस जांच में सबसे बड़ा पेंच प्रदेश सरकार की अनुमति को लेकर फंसा था, जिसके कारण स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी भी इसकी ओर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे।
महीने भर तक ट्रायल बेसिस पर चलने वाली इस लैब के परिणामों की समीक्षा करने के बाद प्रदेश सरकार ने इसे पूरी तरह से लागू कर दिया है, जिससे मरीजों को खून से संबंधित कोई भी जांच अब से बाहर नहीं करानी होगी।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्त की मानें तो प्रदेश सरकार ने जिन जिलों का चयन पैथालॉजी जांच के लिए कर रखा था, उन सभी जिलों में प्रदेश सरकार ने इसकी व्यवस्था एक जनवरी से लागू कर दी है।
इसलिए अभी तक जिला अस्पताल के पैथालॉजी सेंटर में जो जांचें पैसे लेकर की जाती थीं, वह सारी जांचें एसआरएल लैब से कराई जा रही हैं।
जिला अस्पताल स्थित क्षेत्रीय निदान केंद्र (आरडीसी सेंटर) में जो भी मरीज जिला अस्पताल से जांच के लिए जाता है, उसकी जांच के लिए संबंधित व्यक्ति के खून का नमूना लेने के बाद सारी जांचें वहां से करके रिपोर्ट मरीजों को दे दी जाती है।
वहीं विगत एक महीने से जिला अस्पताल के आरडीसी सेंटर में संचालित एसआरएल लैब मेें अब तक करीब 300 से मरीज जांच करा चुके हैं।
इन जांचों में कई जांचें ऐसी भी हैं, जो अभी तक जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। इस कारण इन जांचों के लिए मरीजों को या तो हायर हॉस्पिटल सेंटर के चक्कर लगाने होते थे या फिर प्राइवेट पैथालॉजी के।
लेकिन जिला अस्पताल में इसकी व्यवस्था हो जाने से अब मरीजों को कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता और उनकी सारी जांचें यहीं हो जाती हैं।
कुछ इस तरह जोन में बांटकर बनाए गए क्लस्टर
क्लस्टर शामिल किए गए जिले
फैजाबाद फैजाबाद, गोंडा, बहराइच, अम्बेडकरनगर
गोरखपुर गोरखपुर, कुशीनगर, बस्ती
इलाहाबाद इलाहाबाद, वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर,
आगरा आगरा, वृंदावन, मैनपुरी, अलीगढ़
झांसी झांसी, हमीरपुर, फतेहपुर, बांदा
कानपुर कानपुर, उर्सला, फरुखाबाद, कन्नौज, उन्नाव
बरेली बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, हल्दवानी
मेरठ मेरठ, सहारनपुर, मुज्जफरनगर, रुड़की
लखनऊ लखनऊ, हरदोई, रायबरेली, सीतापुर, लखीमपुर, लखीमपुर