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झाड़ियों में छिपा दिया सरकारी अनाज

Tue, 08 Sep 2015 10:26 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
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अनाज कालाबाजारी की माफिया ने नई तरकीब निकाल ली है। इसे रास्ते में वाहनों से उतारकर झाड़ियों में छिपा दिया जाता है और बाद में मौका देखकर गायब कर देते हैं।
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एफसीआई गोदाम के पास झाड़ियों में छिपा कर रखा गया गरीबों का 87 हजार रुपये का 60 बोरा अनाज सोमवार को माफिया उठा ले गए।

लोगों के शिकायत करने के बावजूद न तो संबंधित विभाग के अधिकारियों ने सुध ली और न ही पुलिस ने उसे देखने की जहमत उठाई। अब अनाज माफिया व अधिकारियों की मिलीभगत होने को लेकर अंगुली उठाई जा रही है।

नगर से सटे कचहरी स्टेशन के पास भारतीय खाद्य निगम का गोदाम है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से अनाज का उठान किया जाता है। एफसीआई गोदाम व गोंडा कचहरी रेलवे स्टेशन के बीच सोमवार को कुछ लोगों ने देखा कि झाड़ियाें व गड्ढों में करीब 60 बोरा अनाज छिपा कर रखा गया है।
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झाड़ियों में पड़े अनाज को देख कर भीड़ जमा हो गई। बोरों पर पंजाबी भाषा में कुछ लिखा था। इसकी सूचना ग्रामीणों ने पुलिस व गोदाम के अधिकारियों को दी। लेकिन न तो किसी विभाग को कोई अधिकारी देखने पहुंचा और न ही पुलिस ने उसे देखना मुनासिब समझा।

वहीं झाड़ियों में अनाज छिपा कर रखा जाने को लेकर भारतीय खाद्य निगम के गोदाम व कचहरी स्टेशन के आसपास लोगों में दिन भर चर्चा का विषय बना रहा। 

ऐसा माना जा रहा है कि किसी अनाज माफिया ने गरीबों के अनाज को कालाबाजारी में बेचने के लिए चोरी में झाड़ियों में छिपा कर रखा था। लेकिन सोमवार को मामला खुल जाने के बाद अनाज माफिया ने मौके की नजाकत को भांपते हुए उसे वहां से शाम को हटवा कर गायब करवा दिया।

घटना के 24 घंटे के बाद भी प्रशासन इस बारे में यह जानकारी नहीं कर सका कि ये अनाज कहां का था और कहां कौन ले गया। एफसीआई गोदाम से यह अनाज सार्वजनिक वितरण के लिए जा रहा था तो रास्ते में कैसे उतर गया, जबकि रोड भी खराब नहीं है और कोई वाहन भी नहीं पलटा था। ऐ

से में अनाज छिपाने के पीछे किसका हाथ है और वहां से फिर अनाज से भरे बोरे कहां भेज दिए गए, लोग इस बात को लेकर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत मान रहे हैं।

जिले के अनाज माफिया का खेल एफसीआई गोदाम से शुरू हो जाता है। एफसीआई गोदाम से अनाज की निकासी होते ही माफिया रास्ते में जगह-जगह ट्रकों से माल उतरवाने लगते हैं। ब्लॉकवार आवश्यक वस्तु निगम के गोदाम पहुंचते-पहुंचते अनाज के बोरे कम हो जाते हैं।

अनाज के बोरों की गिनती ठीक करने के लिए आवश्यक वस्तु निगम गोदाम प्रभारी अन्य बोरों में अनाज की पलटाई कर देते हैं और हर बोरे में 50 किलोग्राम की जगह 40 किलोग्राम का बोरा सिलकर तैयार करवा देते हैं,  ताकि अनाज के बोरों की गिनती पूरी हो जाए।

ऐसे में गरीबों को कम अनाज से ही संतोष करना पड़ता है। सार्वजनिक वितरण व वितरण व्यवस्था में सुधार लाने के लिए पर्यवेक्षणीय अधिकारी भी तैनात किए गए हैं, लेकिन ये सब महज दिखावा बनकर रह गया।

एफसीआई गोदाम से निकलने वाले अनाज पर माफिया मुख्य द्वार से ही हावी हो जाते हैं। मुख्य द्वार से ही बोरे उतरने का काम शुरू हो जाता है। यहां कुछ ट्रांसपोर्टर ही अपना माल उतरने में माहिर हैं।

इसके बाद मुडेरवांकला ढाबा, इमरतीविसेन पेट्रोल टंकी के पास, मल्लापुर बाजार, कटराबाजार रोड पर चंदवतपुर घाट, बलरामपुर रोड सुुुभागपुर बाजार, बकठोरवा, परासराय पेट्रोल टंकी के पास, उतरौला रोड सालपुर बाजार में दिनभर एफसीआई से ब्लॉकों के गोदाम से जाने वाले वाहनों से अनाज की कालाबाजारी होती है।

इस कार्य में कुछ कोटेदार भी लिप्त हैं। यहां अनाज उतारने वाले माफिया का अपने हल्के के अधिकारियों व पुलिस से मिलीभगत कर व्यवसाय फल फूल रहा है। सूत्रों का कहना है कि यदि कोई ग्रामीण व स्थानीय व्यक्ति इसकी शिकायत भी करता है तो उल्टे उसी को ही धमकी मिल जाती है।

कचहरी स्टेशन के पास अनाज पड़ा होने की जानकारी नहीं मिली है। न ही किसी गोदाम प्रभारी ने ही इस तरह की कोई सूचना दी है। वह अनाज आवश्यक वस्तु निगम का है कि नही, वे इस मामले की विभागीय गोदाम प्रभारियों से जानकारी लेंगे। - राकेश पाण्डेय, जिला प्रबंधक आवश्यक वस्तु निगम गोंडा।

एफसीआई के बाहर मिलने वाले अनाज के बारे में उनसे कोई मतलब नहीं है। उन्हें गोदाम के अंदर के अनाज से मतलब है। बाहर यदि कोई अनाज मिलता है तो उसके जिम्मेदार आवश्यक वस्तु निगम के अधिकारी व गोदाम प्रभारी हैं। -रवि शास्त्री, क्षेत्रीय प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम गोंडा।
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