गोंडा। फर्जी नियुक्ति मामले की जांच यूपी एसटीएफ से कराने के निर्णय से शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। जांच की जद में कई बीएसए, लेखाधिकारी व एडी बेसिक के कार्यकाल आ रहे हैं। इसके साथ ही पांच सौ से अधिक शिक्षक भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2017 में कस्तूरबा गांधी विद्यालय में नियुक्ति के दौरान फर्जीवाड़ा शुरू हुआ था। कथित शिक्षिका अनामिका शुक्ला ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय से वेतन का भुगतान लिया। वहीं, 2020 में रामपुर टेंगरहा स्थित लघु माध्यमिक विद्यालय में अस्थायी नियुक्ति हासिल कर ली। वर्ष 2023 में मामला प्रकाश में आया तो तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी ने इस नाम की किसी शिक्षिका के वेतन भुगतान से इन्कार कर दिया। हालांकि जनवरी 2024 में एक बार फिर अनामिका शुक्ला के नाम पर वेतन भुगतान कर दिया गया। ऐसे में एक बार फिर प्रकरण प्रकाश में आ गया।
विभागीय जानकारों का कहना है कि वर्ष 2014 में लघु माध्यमिक विद्यालय लगभग 146 शिक्षकों के वेतन का भुगतान होता था। वहीं, जनवरी 2025 में 688 शिक्षकों के वेतन भुगतान की जानकारी सामने आई। इसकी किसी को भनक नहीं लगने दी गई। नगर कोतवाल विवेक त्रिवेदी ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद जल्द ही विवेचना यूपी एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी जाएगी।
वर्षों से एक ही पटल पर जमे हैं लेखा के बाबू
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने एक जिले व कार्यालय के साथ ही पटल पर तैनाती के लिए मानक बना रखे हैं। मगर लेखा विभाग कार्यालय में इसको लेकर कोई मापदंड नहीं है। वर्षों से एक ही पटल पर बाबुओं की तैनाती है। लेखाधिकारी एक समय के बाद हटा दिए मगर बाबू टस से मस नहीं हुए। इतना ही नहीं, आरोपों से घिरे बाबुओं के हवाले ही पत्रावलियां रखी गई है।
तत्काल पद से हटाए जाएं आरोपी
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष अनूप कुमार सिंह ने बताया कि नामजद सभी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाना चाहिए। फर्जीवाड़े से जुड़ी पत्रावलियों को कब्जे में लेना चाहिए।