गोंडा। स्वास्थ्य विभाग ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जन्म लेने वाले सांस व अन्य बीमारियों से ग्रसित नवजात के इलाज के लिए अलग से चार बेड के एनबीएसयू (न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट) की स्थापना करने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक सीएचसी पर पहले से लगे चार वार्मर को एक्टिव करने की तैयारी है।
जिला महिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रतिदिन 50 से अधिक प्रसव होते हैं। इनमें औसतन 20 बच्चों को जन्म के समय सांस लेने में दिक्कत होती है। जिसके लिए इन्हें कुछ घंटों तक एसएनसीयू में ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। सिर्फ जिला महिला अस्पताल में ही 15 बेड का एसएनसीयू है। ऐसे में सीएचसी पर जन्म लेने वाले बच्चों को भी यहीं लाया जाता है।
रास्ते में बिना ऑक्सीजन लगाए महिला अस्पताल तक आने में नवजात की हालत गंभीर हो जाती है। ऐसे में अब सीएचसी पर भी न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट की सुविधा शुरू करने की तैयारी की गई है। सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि सभी सीएचसी पर नवजात काॅर्नर व न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट शुरू कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
जरूरत पड़ने पर पहुंचेंगे विशेषज्ञ
13 सीएचसी पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हैं, लेकिन किसी बच्चे के गंभीर होने पर ऑन कॉल दूसरे अस्पताल या मुख्यालय के बाल रोग विशेषज्ञ पहुंचकर उपचार करेंगे। जिला कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि न्यू बॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट में फोटोथैरेपी, रेडियो वार्मर (जॉइंडिस मरीज के लिए), वार्मर मशीन, ऑक्सीजन, बीपी मशीन आदि की व्यवस्था की गई है। इसमें प्रशिक्षण प्राप्त स्टाफ नर्सों की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाएगी।
कर्मियों को मिला प्रशिक्षण
सीएमओ कार्यालय सभागार में सीएचसी पर तैनात स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया गया। इसमें उन्हें नवजात की कैसे देखभाल करें, समस्या होने पर किस तरह से उन्हें ऑक्सीजन दें, कौन-कौन सी दवाएं दें, इन तमाम बिंदुओं पर जानकारी दी गई। इस सुविधा को जल्द ही शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
इस तरह होगा प्रबंध
यूनिट सीएचसी पर लेबर रूम के पास स्थापित की जानी है। जन्म के बाद अगर बच्चा पीलिया, लो बर्थ वेट समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित होता है तो उसे फौरन इस यूनिट में शिफ्ट कर रेडिएंट वार्मर और फोटोथैरेपी पर रखा जाता है, जिससे नवजात को बीमारियों से निजात मिलती है। यूनिट सीएचसी पर लेबर रूम के पास स्थापित की जानी है। जन्म के बाद अगर बच्चा पीलिया, लो बर्थ वेट समेत अन्य बीमारियों से ग्रसित होता है तो उसे फौरन इस यूनिट में शिफ्ट कर रेडिएंट वार्मर और फोटोथैरेपी पर रखा जाता है, जिससे नवजात को बीमारियों से निजात मिलती है।