अब सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की ड्यूटी कहीं अन्यत्र लगाने से पहले सीएमओ को संबंधित सीएचसी-पीएचसी में किसी अन्य डॉक्टर की ड्यूटी लगानी होगी। ताकि उस सीएचसी-पीएचसी पर मरीजों को किसी तरह की कोई असुविधा न हो। ऐसा होने से न सिर्फ मरीजों को सहूलियत मिलेगी, बल्कि सीएचसी-पीएचसी के उन डॉक्टरों पर भी नकेल कसेगी, जो आए दिन खुद की ड्यूटी कोर्ट इवीडेंस (न्यायालय साक्ष्य) और पोस्टमार्टम में लगी बताकर गायब हो जाते हैं।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने सीएमओ को गाइड लाइन के तहत इस नई व्यवस्था का अनुपालन अविलंब सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। ताकि अभी जिन अस्पतालों में मरीजों को इस दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उससे उन्हें निजात दिलाई जा सके।
जिले में ब्लॉक वार स्थित 16 सीएचसी व 50 पीएचसी में मौजूदा समय सवा सौ से अधिक डॉक्टर तैनात हैं। इसके बावजूद मरीजों को अपने गांव के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को छोड़ इलाज के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
इसमें उनका पैसा और समय बर्बाद होता है। जिसके पीछे ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों की गैरहाजिरी एक बड़ा कारण होती है।
जब भी कोई व्यक्ति इन स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज कराने जाता है तो वहां का स्टाफ ये कहकर चलता कर देता है कि आज डॉक्टर साहब कोर्ट इवीडेंस में गए हैं तो कल पोस्टमार्टम में जाएंगे। जबकि होता इससे कहीं उलट है।
इसी के मद्देनजर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने सीएमओ को एक गाइड लाइन के तहत सीएचसी-पीएचसी में तैनात डॉक्टरों की ड्यूटी केवल विशेष परिस्थितियों में ही लगाने का आदेश दिया है।
साथ ही उन्हें कोर्ट इवीडेंस व पोस्टमार्टम में ड्यूटी लगी होने पर संबंधित सीएचसी-पीएचसी में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किसी दूसरे डॉक्टर की ड्यूटी लगाने के भी निर्देश दिए हैं।
ताकि जिस दिन सीएचसी-पीएचसी के किसी डॉक्टर की ड्यूटी कोर्ट इवीडेंस व पोस्टमार्टम में लगे, उस दिन दूसरा डॉक्टर संबंधित स्वास्थ्य केंद्र में बैठकर मरीजों का इलाज करे। जिससे उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो।
ऐसा होने से न सिर्फ मरीजों को सहूलियत होगी, बल्कि सीएचसी-पीएचसी में तैनात डॉक्टर की गैरहाजिरी का पता भी स्वास्थ्य महकमे को चलता रहेगा।