बिजली, पंचायत, स्वास्थ्य, शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने डीएम के हाथों में सौंपी गई आमजनों की शिकायतों को भी गंभीरता से नहीं लिया। बार-बार तय समय में शिकायत निस्तारण करने को लेकर दिए गए निर्देशों को अधिकारियों ने जरा भी गंभीरता से नहीं लिया। ऐसे में बुधवार को डीएम ने अधिकारियों को नोटिस देकर तीन दिन में शिकायतों के निस्तारण की रिपोर्ट मांगी है। लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
डीएम नेहा शर्मा ने 20 जून को ग्राम चौपाल की शुरुआत की थी। अगस्त तक सभी 16 ब्लॉकों के 96 ग्रामों में ग्राम चौपाल लगाई गई। प्रत्येक सप्ताह मंगलवार और शुक्रवार को चौपाल का आयोजन किया गया। इस दौरान जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने खुद गांवों में जाकर लोगों की शिकायतें सुनीं। संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। मगर जिला पंचायतीराज अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, अधीक्षण अभियंता, बीएसए और जिला कार्यक्रम अधिकारी ने शिकायतों का निस्तारण तो दूर डीएम के बार-बार गुणवत्तापूर्ण निस्तारण की चेतावनी पर कार्रवाई तो दूर आख्या तक नहीं उपलब्ध कराई। बुधवार को जन शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा में इन छह अधिकारियों से जवाब तलब किया गया। इस पर ये अधिकारी संतोषजनक जवाब देने के बजाय बगले झांकने लगे। डीएम ने सख्त रवैया अपनाते हुए लापरवाह अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस थमाकर तीन दिन में जवाब देने का समय दिया है।
पिछले दिनों में 'अमर उजाला' ने आमजनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपने अंक में प्रमुखता से बार-बार शिकायतों के बावजूद समस्या निस्तारण न होने को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठाया था। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लेकर निस्तारण की गुणवत्ता और कार्रवाई की समीक्षा शुरू की है। डीएम ने कहा कि जनशिकायतों पर चलताऊ टिप्पणी व रिपोर्ट देने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। संशय की स्थिति में पीड़ितों से फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई होगी।