ब्रेन की बीमारी से पीड़ित एक महिला की रुपयों के अभाव में समय पर इलाज न मिलने के कारण रविवार को शहर के निजी अस्पताल में मौत हो गई। पत्नी का इलाज कराने के लिए उसका पति बैंक से लेकर एटीएम तक पैसे निकालने के लिए दौड़ता रहा, मगर बैंक कर्मियों ने लिमिट बताकर उसे रुपये नहीं निकालने दिए। बैंक प्रबंधन ने महिला के पति के आरोपों को निराधार बताया है।
खरगूपुर थाना क्षेत्र के विशुनापुर के रहने वाले अकबर अली ने बताया कि उसकी पत्नी धन्ना ब्रेन की बीमारी से ग्रसित थी। अकबर के मुताबिक उसने पत्नी को एक सप्ताह पहले शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां चिकित्सकने रविवार को ऑपरेशन करने को कहा था। इसके लिए 30 हजार रुपये का खर्च बताया था।
अकबर ने बताया कि शनिवार को वह एसबीआई की विशुनापुर शाखा में रुपये निकालने के लिए गया था। वहां अपने खाते से उसने 30 हजार रुपये निकालने के लिए विड्राल भरा, मगर बैंक कर्मियों ने रुपये की कमी बताते हुए उसे एक हजार से अधिक भुगतान करने से मना कर दिया।
अकबर ने बताया कि वह पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए बैंक कर्मियों से गिड़गिड़ाता रहा, मगर वह नहीं मानें। इसके बाद वह बैंक के प्रबंधक से मिला, लेकिन उन्होंने भी एक हजार रुपये से अधिक भुगतान करने से मना कर दिया। अकबर के मुताबिक इसके बाद वह शहर के कई एटीएम के चक्कर लगाता रहा, लेकिन रविवार होने के कारण एटीएम भी खाली रहे और उसे रुपये नहीं मिल सके, जिससे रुपयों के अभाव में उसकी पत्नी का ऑपरेशन नहीं हो सका और उसकी मौत हो गई।
उधर, संडे की बैंक बंदी ने लोगों को बेहाल कर दिया। बैंक बंदी के साथ एटीएम भी बंद रहे। कुछ एटीएम ही काम करते देखे गए। स्टेट बैंक मुख्य शाखा पर ही नोटों की निकासी हो रही थी। यहां लोगों की लंबी कतार लगी थी, जिससे लोगों को मुश्किलों से जूझना पड़ा। उधर, प्रभारी प्रबंधक एसबीआई विशुनापुर जगत सिंह राणा ने कहा कि बीमार पत्नी के इलाज के लिए रुपये निकालने के लिए खाताधारक अकबर उनसे नहीं मिला था। न ही उसने बताया कि उसे रुपये की बहुत जरूरत है।
कहते हैं कि नसीब साथ दे तो सब कुछ अच्छा होता है। मगर बीमार धन्ना के नसीब ने उसका साथ छोड़ दिया। इलाज के लिए रुपये का इंतजार करने के लिए अकबर अली दौड़ता रहा, लेकिन रुपयों का इंतजाम भी नहीं हो पाया। एटीएम के भी वह चक्कर लगाता रहा। एटीएम भी दगा दे गया, जिससे अकबर के आंखों के सामने ही उसकी पत्नी ने दम तोड़ दिया।