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गोंडा रूट पर बिना रुके दौड़ेंगे वाहन

Mon, 23 May 2016 11:44 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
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पीजीआई चौक से नया गांव जाने वाली सड़क - फोटो : amar ujala
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जरवल से गोंडा के बीच लोग बिना किसी रोक-टोक अपने दुपहिया व चार पहिया वाहनों से फर्राटा भर सकें, इसके लिए पीडब्ल्यूडी जंहगिरवा और कटरा शहबाजपुर के बीच पड़ने वाली दोनों रेल क्रॉसिंगों को फोरलेन रोड के नक्शे से हटाने की तैयारी में जुट गया है।
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इसके लिए जंहगिरवा से कटरा शहबाजपुर के बीच फोरलेन रोड को रेल लाइन के किनारे-किनारे चार किलोमीटर तक घुमाने का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी ने तैयार किया है, जिसमें कहीं भी रेल क्रॉसिंग का कोई दखल नहीं होगा और लोग बेरोक-टोक राजधानी की यात्रा आसानी से कर पाएंगे।

जरवल रोड से गोंडा के  बीच भंभुवा से आगे बढ़ते ही जंहगिरवा गांव के पास पहली रेल क्रॉसिंग पड़ती है, जबकि इसी क्रॉसिंग से महज डेढ़ किलोमीटर दूरी पर दूसरी रेल क्रॉसिंग कटराशहबाजपुर गांव के पास आ जाती है।
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खास बात यह है कि यह दोनों ही क्रॉसिंग गोंडा-लखनऊ रेल रूट के एक ही ट्रैक की हैं, जो डेढ़ किलोमीटर की दूरी में गोंडा-लखनऊ रोड को दो अलग-अलग जगहों पर क्रॉस करते हुए आगे जाकर सरयू नदी से कुछ पहले फिर से अपनी पहली जैसी स्टेज में आ जाती हैं। 

ऐसे में फोरलेन रोड को इसी रेल लाइन के किनारे-किनारे जंहगिरवा गांव से चार किलोमीटर दूरी में घुमाते हुए फिर से कटरा शहबाजपुर गांव के पास मेन गोंडा-लखनऊ से जोड़ने का हालिया प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी ने तैयार किया है, जिसकी कुल लागत 35 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जिसमें रेल लाइन सड़क के किनारे-किनारे होग, जिसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी कायदे आजम लारी का कहना है कि फोरलेन रोड के इस्टीमेट में इस प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं है। यह नया प्रस्ताव लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मुहैया कराने के लिए तैयार किया गया है, ताकि रोड से आने-जाने वाले लोगों को रेल क्रॉसिंग की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाए। 

जरवल से गोंडा के बीच बनने वाली फोरलेन रोड के रास्ते में पड़ रही दो रेल क्रॉसिंगों को हटाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने चार किलोमीटर रोड को घुमाने का प्रस्ताव यूं हीं नहीं तैयार किया। बल्कि यह प्रस्ताव उस 105 करोड़ रुपये को बचाने के लिए तैयार किया गया है जो रेल ओवरब्रिज के निर्माण पर खर्च होने वाला था।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मानें तो एक रेल ओवरब्रिज के निर्माण की कुल लागत 70 करोड़ रुपये होती है। इस तरह से दो ओवरब्रिजों पर कुल खर्च 140 करोड़ रुपये आता है।

लेकिन जब वह फोरलेन रोड को रेल लाइन के किनारे-किनारे घुमा कर ले जाएंगे, तो इसमें सिर्फ सड़क निर्माण की कास्ट ही बढ़ेगी, बाकी ओवरब्रिज टाइप का कोई खर्च नहीं आएगा। भूमि अधिग्रहण पर करीब 35 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे, लेकिन फिर भी 105 करोड़ रुपये की बचत होगी।

जरवल-गोंडा फोरलेन रोड को रेल क्रॉसिंग मुक्त करने के लिए जो प्रस्ताव हुआ ने तैयार कर शासन को भेजा है, अगर उसकी अनुमति अधिकारियों को मिल जाती है, तो इसका सबसे ज्यादा असर करनैलगंज इलाके के दो माननीयों पर पड़ेगा।

हालांकि एक फायदा उन्हें यह जरूर होगा कि राजधानी का रास्ता उनके घर की ड्योढ़ी को छूकर निकलेगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रोड की जद में ज्यादातर भूमि इन्हीं दो माननीयों की पड़ेगी, जिसमें एक नाम सपा के पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह का है तो दूसरा पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैय्या का। यही वजह है कि शासन में इसका प्रस्ताव पास होगा भी या नहीं, इसे लेकर लगातार संशय बना हुआ है।
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