गोंडा। सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाओं को आम जन तक पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन यहां के हालात और आंकड़े कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं। स्वास्थ्य केन्द्रों की बात करें तो जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की भरमार है लेकिन जांच और इलाज के संसाधनों का अकाल है। इसके चलते ग्रामीण इलाकों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराने के लिए चल रही योजनायें केवल कागजों तक ही सीमित है और लोगों को मामूली इलाज के लिए जिले की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिले में सीएचसी और पीएचसी मिलाकर कुल लगभग 66 सरकारी अस्पताल संचालित हैं। लेकिन यहां मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सक तक समुचित ढंग से विभाग के पास नहीं हैं। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र केवल वार्ड बॉय या फिर फार्मासिस्टों के भरोसे ही चल रहे हैं। इतना ही नहीं सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर बीमारी की पहचान करने के लिए स्थापित पैथोलॉजी, एक्सरे रूम और अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था हर सीएचसी पर है, लेकिन यहां जांच के लिए कर्मचारी ही मौजूद नहीं हैं।
कई सीएचसी पर एक्सरे रूम बंद चल रहे हैं, वहीं अल्ट्रासाउंड की सुविधा केवल जिला अस्पताल में ही मौजूद है। इन 66 स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही जिला स्तरीय अस्पतालों को भी मिलाकर मरीजों के इलाज के लिए पूरे जिले मे केवल 61 डॉक्टर ही मौजूद हैं। जिला अस्पताल में भी एक्सरे और अल्ट्रासाउंड भी केवल नाम का ही है। एक्सरे की रिपोर्ट के नाम पर लोगों को फोटो स्टेट कॉपी दी जा रही है, वहीं अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट भी मरीज के पर्चे पर ही लिख दी जाती है।
जिले में सिर्फ एक रेडियोलॉजिस्ट
जिले की 16 सीएचसी और जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए केवल एक ही रेडियोलाजिस्ट डॉ. पीके श्रीवास्तव हैं। सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि जिले में रेडियोलाजिस्ट केवल एक ही हैं। वो अंडर ट्रांसफर चल रहे हैं। किसी तरह उन्हें रोका गया है। जिससे जिले की सुविधायें प्रभावित न होने पायें।
16 सीएचसी पर केवल 3 एक्सरे टेक्नीशियन
यहां स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सरे टेक्नीशियन की बड़े स्तर पर कमी है। केवल सीएचसी पर एक्सरे टेक्नीशियन ही मौजूद हैं। इसके चलते यहां मरीजों का एक्सरे नहीं हो पा रहा है। वहीं पैथोलॉजिस्ट के नाम पर लैब असिस्टेंट से काम चलया जा रहा है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर ही नहीं
जिला महिला अस्पताल में स्त्री रोगों की अधिकांश जांच अल्ट्रासाउंड के जरिये होती है। लेकिन यहां किसी भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। इसके लिए मनकापुर सीएचसी के एक डॉक्टर को दो दिन के लिए यहां अटैच किया गया है। लेकिन वो भी हर सप्ताह नहीं आते हैं।
गोंडा के अस्पतालों की स्थिति
जिले में कुल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 50
जिले में कुल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 16
नगरीय स्वास्थ्य केंद्र 02
जिले में कुल चिकित्सक 61 सीएमओ सहित
लगभग 12 डॉक्टर चल रहे ट्रेनिंग पर
जिले में चिकित्सकों के नाम पर सीएमओ सहित कुल 61 डॉक्टरों की तैनाती है। लेकिन इनमें से भी लगभग एक दर्जन डॉक्टर परास्नातक प्रशिक्षण के लिए ट्रेनिंग के लिए छुट्टी पर चल रहे हैं। जिसके चलते मरीजों के लिए केवल लगभग 50 डॉक्टर ही मौजूद हैं।
सीएचसी और पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संसाधनों की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक्सरे की जांच के लिए पांच सीएचसी पर डिजिटल एक्सरे की यूनिट के लिए प्राइवेट एजेंसी को ठेका दिया गया है। सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। -डॉ मधू गैरोला, मुख्य चिकित्साधिकारी