गोंडा। मेडिकल कॉलेज में इलाज की बेहतर सुविधा के नाम पर मरीजों से छलावा हो रहा है। यहां सरकारी परचे पर एक-दो दवाएं लिखने के बाद मरीजों को खास दवा दुकानों से मिलने वाली बाहर की दवाएं छोटी पर्चियों पर अलग से लिख कर दी जा रही है। छोटी पर्ची पर लिखी जाने वाली महंगी ब्रांडेड दवा की खरीद में मरीजों की जेब ढीली हो रही है। सरकारी अस्पताल में सस्ते इलाज की उम्मीद से आने वाले मरीजों को एक्सरे व खून से जुड़ी जांचों के लिए भी निजी केंद्रों पर महंगी जांच के लिए भेजा जा रहा है।
बुधवार को मेडिकल कॉलेज में करनैलगंज से आए जयप्रकाश पांडेय ने बताया कि हाथ उठाने में परेशान के बाद मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने पांच दवाएं बाहर की लिख दी।साथ ही बताया कि जल्द आराम दिलाने वाली यह दवाएं अस्पताल में नहीं मिलेगी। चौक बाजार निवासी समीर ने बताया कि पत्नी की आंख दिखाने आए थे। डॉक्टर ने तीन दवाएं परचे पर लिख कर दी। इसमें से दो दवाएं तो अस्पताल से मिल गई हैं, लेकिन आंख में डालने वाला ड्रॉप बाहर से महंगे दाम पर खरीदना पड़ा।
बाहर की दवा लिखने पर रोक
मेडिकल कॉलेज में लगभग सभी दवाएं उपलब्ध हो गई हैं। मरीजों को अस्पताल की दवाएं ही दी जानी चाहिए। यदि कोई चिकित्सक बाहर की दवाएं लिख रहा है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अनिल तिवारी, सीएमएस