गोंडा। जिला अस्पताल परिसर में जिस मल्टी स्टोरी आधुनिक अस्पताल का निर्माण दो साल पहले पूरा होकर हैंडओवर किया जाना था। वह आज भी निर्माणाधीन ही है। जिलाधिकारियों की चेतावनी को कार्यदायी संस्था ने कोई तवज्जो नहीं दिया और निर्माण की मियाद भी दो साल पहले खत्म हो गई पर मल्टी स्टोरी अस्पताल का भवन पूरा नहीं हो सका। इससे मरीजों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में करीब 100 वार्ड बने हैं। मंडल मुख्यालय को देखते हुए शासन की ओर से वर्ष 2013 में जिला अस्पताल को उच्चीकृत करते हुए इसे मंडलीय अस्पताल बनाये जाने का शासन ने प्लान किया था। पहले दौर में जिला अस्पताल परिसर में 200 बेड वाले अस्पताल के नये भवन बनाने का काम राजकीय निर्माण इकाई को दिया गया था। इसके लिए 27 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया था। शासन की ओर से निर्माण कराने वाली संस्था को बजट जारी कर दिया गया था।
बीच में काम रुका रहा। यही नहीं कुछ काम बढ़ने की वजह से इसमें कुछ और रकम की डिमांड की गई शासन ने उसे पूरा कर कुल 32 करोड़ रुपये का बजट जारी किया। भवन बन कर तैयार हो गया है। इस भवन को विभाग को 2017 में हैंडओवर करने की डेडलाइन तय की गई थी जो कई बार बढ़ते-बढ़ते 2019 को भी पूरा कर लिया अभी काम बाकी है। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक की ओर से इस बारे में कई बार कड़े निर्देश दिये जा चुकी है। अभी तक लिफ्ट तक नहीं लग सकी है। लिफ्ट लगाने का काम धीरे-धीरे हो रहा है। बताया जाता है कि कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार लापरवाही कर रहे हैं।
बिजली-पानी का नहीं हो सका कनेक्शन
मंडलीय अस्पताल के नये भवन में अभी तक विभाग बिजली का न तो कनेक्शन करा पाया है न। ही पानी का कनेक्शन कराया। दोनो चीजें काफी महत्वपूर्ण है। राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी भी इस ओर ध्यान नही दे रहे हैं, जबकि जो निर्माण लागत बढ़ी उसका भी भुगतान विभाग पा चुका है। अस्पताल के नये भवन में सामान काफी बिखरा पड़ा हुआ है।
ओपीडी के सामने भीड़ लगने से बंद हो जाता है रास्ता
जिला अस्पताल के ओपीडी के सामने भीड़ लगती है। बड़ी तादात में मरीजों के ओपीडी के बाहर अपने बारी का इंतजार करने से अस्पताल के अन्दर रास्ता बन्द हो जाता है। जिला अस्पताल के चर्म रोग विभाग,सर्जन व फिजीशियन कक्ष के सामने मरीजों का रोजाना जबरदस्त भीड़ लग जाती है। भीड़ भी ऐसी लगती है कि अपनी बारी आने भर की जानकारी करने के लिए घंटों धक्कामुक्की करनी पड़ती है। ऐसे में भीड़ की वजह से एक विभाग से दूसरे विभाग में आने जाने के लिए न सिर्फ मरीज व तीमारदार बल्कि जिला अस्पताल के कर्मियों को भी जूझना पड़ता है। इसी भीड़ का फायदा उठा कर जेब कतरे व उच्चके लोगों पर्स,चेन व मोबाइल भी उड़ा देते हैं।
वार्ड फुल बरामदे में लिटाये जा रहे मरीज
गोंडा। जिला अस्पताल के कई विभाग के वार्ड मरीजों से भरे हैं, मरीजों के आने पर उन्हें कई विभागों के वार्ड के अलावा अब बरामदे में बेड लगाकर भर्ती किया जा रहा है। जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड मरीजों से भरे हैं। कई बेड बरामदे में लगा कर मरीजों को लिटाया गया है। इसी तरह से पुरूष व महिला मेडिकल वार्ड न सिर्फ फुल है बल्कि उसके बीच में बचे जहग में भी चार चार बेड लगाया गया है। इतना ही नही दोनो वार्ड के बगल खाली पड़े बरामदे में मरीजों को बेड लगाकर उनका इलाज किया जा रहा है। ऐसे मरीजों की न ठीक से देखभाल हो पा रही है न ही उन्हें मेडिकल सुरक्षा मिल पा रही है।
आय दिन मरीजों की चीजें हो रही चोरी
गोंडा। अस्पताल में सभी वार्ड फुल होने से सैकड़ों मरीजों को बरामदे में भर्ती किया गया है। इसी का फायदा उठा कर उच्चके मरीजों व उनके तीमारदारों की वस्तुएं चुरा ले जा रहे हैं। अस्पताल में आय दिन मरीजों व उनके तीमारदारों की मोबाइल चोरी हो रही है। बहराइच जिले के पुरैना बाजार निवासी विजय पाठक ने बेटे को डेंगू होने पर जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती कराया था। रात में उनका स्मार्ट फोन गायब हो गया। उन्होंने बताया कि इसकी शिकायत उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से की है।
कार्यदायी संस्था को कई बार कड़े निर्देश दिये जा चुके हैं। अभी तक काम पूरा नही हो सका है। नीचे पोर्शन का काम हो जाता तो कम से कम हम उसमें ओपीडी ही शुरू कर देते। जिले की आबादी को देखते हुए अस्पताल में जगह कम पड़ रही है कभी कभी मरीजों को बेड तक नही मिल पाता है। -डॉ. अरूण लाल, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल गोंडा।