गोंडा। एक ही छत के नीचे आयुर्वेदिक व यूनानी पद्धति से इलाज कराने की सरकारी मंशा कागजों में सिमट कर रह गई। सीएमओ कार्यालय की पीछे आयुष विंग बनाया गया, लेकिन यहां दो साल से दवा की अलमारी खाली है। आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सक भी परामर्श देकर एलोपैथी की दवाएं मरीजों को लिख रहे हैं।
शासन से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला स्तरीय अस्पताल और सभी सीएचसी व पीएचसी में भी एलोपैथ के साथ ही आयुर्वेदिक दवाएं मरीजों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इसके लिए अस्पतालों में संविदा पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती भी हुई है। शुरूआत में काफी संख्या में पर्याप्त आयुर्वेदिक दवाएं को उपलब्ध कराई जा रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे दवाओं की कटौती शुरू कर दी गई।
स्थिति यह हो गई है कि करीब दो सालों से कोई दवा मिली ही नहीं। सीएमओ कार्यालय के पीछे संचालित आयुष विंग में आयुर्वेद के डॉक्टर के तौर पर डॉ. उमेश सिंह व यूनानी चिकित्सक के रूप में डॉ. वसीम की तैनाती है। लेकिन इनके पास दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। सोमवार को आयुष विंग में दिखाने वाले कई मरीज मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर पर एलौपैथी की दवाओं के लिए लाइन में लगे दिखाई पड़े। उन्हें सामान्य मल्टी विटामिन की दवा लिखकर वापस भेज दिया गया था।
यूनानी दवाएं कारगर, कोविड के बाद नहीं मिली
यूनानी चिकित्सक डॉ. वसीम ने बताया कि कई बीमारियों में यूनानी दवाएं रामबाण होती हैं। कब्ज, पेट दर्द व बवासीर के लिए इससे बेहतर इलाज एलौपैथी में नहीं है। लेकिन कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद से दवाएं नहीं मिली है। जिससे मरीजों को दो चार प्रकार की दवाएं देकर वापस करना पड़ रहा है। करीब 35 प्रकार की दवाएं अति आवश्यक हैं। हर रोज औसतन 50 मरीज आते हैं। डॉ. उमेश ने बताया कि करीब 100 दवाओं की ओपीडी है, लेकिन दवाओं की बेहद कमी है।
ये हैं जरूरी आयुष दवाएं
आयुष विंग में मरीजों के लिए अभयारिष्ट, दशमूलारिष्ट, संजीवनीवटी, लौगनादिवटी, अर्शकुठार, शीतोप्ला, सुदर्शन चूर्ण, कायम चूर्ण, त्रिफला, कुटजघन वटी, कुटजारिष्ट, बिजला चूर्ण, भाष्कण चूर्ण, गविपतिकर चूर्ण, पुष्यानुग चूूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, गिलोय चूर्ण, चंद्रप्रगावरी, चितकादि चूर्ण, लवगादि चूर्ण, अर्श कुष्कर रस, इच्छाभेदी रस, कोचनार गुग्गुल, महानारायण तेल आदि आयुर्वेदिक दवाएं जरूरी है।
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यूनानी की ये दवाएं जरूरी
पेट दर्द के लिए हमदर्द जवारिश आमला व जवारिश जालीनूस, कब्ज के लिए इतरीफल मुलायन, ताकत के लिए इतरीफल कबीर, खून साफ करने के लिए इतरीफल शाहतारा सहित 30 दवाएं जरूरी हैं।
बजट आ गया, जल्द मिलेंगी दवाएं
पिछले साल आयुष विभाग के लिए बजट की समस्या थी, इस बार बजट आया है, जल्द ही टेंडर करवाकर दवाओं की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। आयुष विंग में नियमित डॉक्टर ओपीडी करते हैं।
- डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ