रुपईडीह/गोंडा। आकांक्षी ब्लॉक रुपईडीह में राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) में करोड़ों रुपये के घोटाले में नौ ग्राम संगठनों के साथ ही तीन समूहों के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई है। वहीं, अधिकतर ग्राम संगठन और समूह की पदाधिकारी महिलाएं न तो जांच कमेटी के सामने पेश हुईं और न ही डीसी एनआरएलएम को स्पष्टीकरण दिया।
रुपईडीह आकांक्षी ब्लॉक में एनआरएलएम के पैसे के बंदरबांट की पुष्टि के बाद सीडीओ अंकिता जैन ने डीसी एनआरएलएम जेएन राव को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डीसी एनआरएलएम जेएन राव ने बताया कि आरोप तय होने के साथ ही संबंधित से स्पष्टीकरण तलब किया गया। इसके बाद एक सप्ताह के भीतर जबाव मांगा गया, मगर शनिवार तक किसी ने अपना जबाव नहीं दिया। जबकि इस मामले में ग्राम संगठन और समूह के खाते से ही पैसे ट्रांसफर किए गए हैं।
इतना ही नहीं, नियम विरुद्ध चेक और कैश भुगतान किया गया है। समूहों को एक से अधिक सीआईएफ भी जारी किए गए। जबकि सीआईएफ के लिए 1.5 लाख रुपये के भी हकदार थे। ऐसे में एक-एक ग्राम संगठन और समूहों पर लाखों रुपये अधिक भुगतान किए गए हैं। बंटरबांट करने के बाद किसी ने अभी तक पूरा पैसा जमा नहीं किया है और न ही नोटिस का कोई स्पष्ट जबाव दिया। अगर सरकारी पैसे को तत्काल जमा नहीं किया गया तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
मामले को रफा-दफा करने की कोशिश..
विभागीय जानकारों का कहना है कि आकांक्षी ब्लॉक में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत अब तक तकरीबन 1.80 करोड़ रुपये का बंदरबांट किया गया है। अगर अन्य मामलों की भी जांच की जाए तो घोटाले का दायरा और बढ़ सकता है। 50 लाख रुपये से अधिक मामले में जांच का अधिकार आर्थिक अपराध शाखा को है। इसके बावजूद भी अधिकारी की ओर से अपने स्तर पर ही मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। सिर्फ नोटिस का खेल चल रहा है। स्थानीय थाने में ही एफआईआर की तैयारी की जा रही है। डीसी एनआरएलएम का कहना है कि टुकड़ों में घोटाला हुआ है। इसमें कई लोगों की संलिप्तता है। ऐसे में पुलिस मामले की जांच करने में सक्षम है।