गोंडा। बच्चों को खबरों से जोड़ने, पढ़ने की आदत विकसित करने व मोबाइल की लत दूर करने के लिए जिले के करीब 3,100 बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में अब रोजाना अखबार वाचन व ग्रुप डिस्कशन कराया जाएगा। यह पहल अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा के निर्देश पर लागू की जा रही है, जिसकी रणनीति तैयार कर ली गई है।
विद्यालयों में हर दिन सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान अखबार की प्रमुख खबरों का वाचन किया जाएगा। इसके साथ ही छात्र-छात्राएं खबरों से जुड़े कम से कम पांच नए शब्दों के अर्थ समझेंगे और उन पर चर्चा करेंगे। इससे बच्चों की भाषा, समझ के साथ ही सोचने व सवाल करने की क्षमता विकसित होगी। अखबार पढ़ने की आदत से बच्चों का स्क्रीन टाइम कम होगा तथा वह मोबाइल व सोशल मीडिया से दूरी बनाएंगे। समाचार वाचन से न सिर्फ उन्हें सही व भरोसेमंद जानकारी मिलेगी, बल्कि समाज व समसामयिक मुद्दों को लेकर उनका अपना नजरिया भी विकसित होगा।
जीआईसी के प्रधानाचार्य डॉ. एके सिंह ने बताया कि अखबारों के नियमित पठन से बच्चों का शब्द कोष बढ़ेगा। भाषा शुद्ध होगी व विचार व्यक्त करने की क्षमता मजबूत होगी। डीआईओएस डॉ. रामचंद्र ने बताया कि अखबार केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सामाजिक समझ भी विकसित करते हैं। विद्यालयों को निर्देशित करने के साथ ही अभिभावकों से अपील की गई है कि वे घर में भी बच्चों को अखबार पढ़ने के लिए प्रेरित करें, ताकि उनमें किताबों व अध्ययन के प्रति रुचि बढ़े।
कम उम्र में खतरनाक होता है ज्यादा स्क्रीन टाइम
मेडिकल कॉलेज की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. नूपुर पॉल ने कहा कि कम उम्र में ज्यादा स्क्रीन टाइम खतरनाक साबित हो सकता है। कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट होना चिंताजनक है। स्क्रीन टाइम कम करने के लिए अखबार आज भी सबसे भरोसेमंद व प्रमाणिक माध्यम हैं, जो बच्चों को भ्रामक सूचनाओं से बचाते हुए सही दिशा देने का काम करेंगे।
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विद्यालयों को जारी किए गए निर्देश
शासन के निर्देश के क्रम में स्कूलों को अखबार मंगाने व समाचार वाचन अनिवार्य करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों का ज्ञानकोश समृद्ध होगा व वे शब्दों के सही प्रयोग को सीख सकेंगे।
अमित कुमार सिंह, बीएसए